बॉस को उन्ही के घर में घोड़ी बना कर चोदा

वो तड़पती हुई मछली की तरह लोड़ा ऐसे चूसने लगीं जैसे आज के बाद दुनिया खत्म हो जाएगी ये आखिरी सेक्स होगा उनकी लाईफ का..

OFFICE SEXBOSS KO CHODA

5/5/20261 min read

दोस्तो, मैं प्रवीण खजुराहो से हूं..खजूराहो तो सेक्स और कामसुत्र के लिए काफी फेमस है..

ये ऐतिहासिक चुदाई उन दिनों की है जब मैं 27 का था,

एक दिन मेरा मन उदास था. पिताजी ने थोड़ा डांट फटकार लगा दी थी.

मैंने सोचा कि क्यों ना में किसी मॉल में जाकर अपना टाइम पास कर लूं और मूड भी फ्रेश कर लूं.

यही सोच कर मैं उधर ही पास के एक मॉल के लिए चल पड़ा.

वहां थोड़ी देर घूमने के बाद मुझे भूख लगी, तो मैंने फ़ूड जोन में जाकर खाने का कुछ आर्डर दिया और एक सीट पर जाकर बैठ गया.

जब मैं एक सीट पर बैठा तो मेरे सामने की सीट पर कुछ दूरी पर एक भाभी जी बैठी थीं.

उनकी उम्र करीब 36 साल की रही होगी.

भाभी जी का कद करीब 5 फुट 7 इंच का होगा और रंग गोरा. भाभी जी एकदम रंडी जैसा माल लग रही थीं.

मैं भाभी जी को देख रहा था और वो मुझे!

कुछ देर ऐसा ही चलता रहा.

करीब तीस मिनट बाद भाभी जी चली गईं.

उनके जाने के दस मिनट बाद मैं भी उठ कर बाहर आ गया.

वहां वही भाभी जी अपनी कार नहीं निकाल पा रही थीं.

उनकी कार ट्रैफिक की वजह से फंस गई थी.

भाभी जी बड़ी परेशान सी लग रही थीं.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनसे पूछ लिया- आपको प्रॉब्लम न हो तो मैं आपकी हेल्प कर देता हूं, मैं आपकी कार निकलवा देता हूँ.

उन्होंने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ मुझे इजाजत दे दी और मैंने उनकी गाड़ी निकाल कर उनको दे दी.

जैसे ही मैंने उनको गाड़ी की चाबी दी, भाभी जी ने मुझे धन्यवाद कहा और पूछा- आप क्या करते हैं?

मैंने बोल दिया- अभी तो जॉब की तलाश में हूँ, कुछ काम नहीं है.

उन्होंने उनकी कार के डैशबोर्ड पर रखे कार्ड्स में से एक विजिटिंग कार्ड उठा कर मुझे दिया और कहा- तीन दिन बाद इस नम्बर पर कॉल कर लेना.

मैंने ठीक वैसा ही किया.

चौथे दिन मैंने कॉल किया.

तो भाभी जी ने ही फोन उठाया.

बातचीत हुई, मैंने अपना परिचय दिया, तो भाभी जी ने मुझे पहचान लिया.

उन्होंने अपना नाम रवीना बताते हुए अपने ऑफिस में बुलाया.

उनका प्रॉपर्टी का काम था.

मैं जब उनके ऑफिस में गया, तो भाभी जी के ऑफिस में उन्हें देख कर मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया.

बाप रे क्या माल लग रही थीं भाभी जी … क्या मस्त तने हुए दूध और क्या उभरी हुई गांड थी.

उनको देख कर लगा कि वाकयी हुस्न क्या चीज होती है.

मेरे मन में भाभी जी के शरीर का एक एक अंग घूम रहा था और मन बहुत बेचैन हो गया था.

फिर मैंने खुद को समझा कर सोच लिया कि शुरुआत भाभी जी करें तो ही कुछ हो सकता है.

भाभी जी ने मुझे जॉब पर रख लिया और मैं मन लगा कर काम करने लगा.

कुछ दिन में पता चला कि भाभी जी का पति बाहर रहता है, वो कहीं विदेश है और साल में बस 2 या 3 बार ही आता है.

मेरे लिए अब काम आसान हो गया था. मेरे दिमाग में आईडिया आया कि मैं भाभी जी को अपनी तरफ आकर्षित करने का काम करता हूँ.

मैंने प्रयास शुरू किए और यही हुआ. मैंने सोचा कि अनजान बन कर मैं भाभी जी को अपनी बॉडी के कुछ पार्ट दिखा देता हूँ.

मैं ऐसा करना शुरू किया तो पाया कि वो भी बड़े गौर से मुझे देखने लगी थीं.

मगर वो कुछ बोलती नहीं थीं.

ऐसा कई दिनों तक चला.

एक दिन मैंने सोचा कि मैं आज कुछ ऐसा करता हूँ, जिससे भाभी जी से रहा ही न जाए.

मैंने ऑफिस के वाशरूम में जाकर अंडरवियर उतार कर अपनी जींस की जेब में रख ली और मेरी ज़िप खुली रहने दी.

मैंने ऐसा दिखाया कि मुझे चैन लगाने का पता ही नहीं है कि मेरी ज़िप खुली है.

तभी रवीना भाभी जी ने मुझे बुलाया और एक फ़ाइल ढूंढने के लिए कहा.

मैं उनके केबिन में फाईल ढूंढने लगा.

उसी समय मैंने ऐसा एंगल बनाया कि मेरी जींस की ज़िप का खुला हिस्सा भाभी जीजी को दिख जाए.

अनजान बन कर मैं फ़ाइल ढूंढता रहा.

मैं गौर कर रहा था कि भाभी जी की नजरें मेरी ज़िप पर पड़ गईं.

उन्होंने 1-2 मिनट इधर उधर देखा और जब उनको यकीन हो गया कि मेरा ध्यान उन पर नहीं है, तो वो गौर से देखने लगीं.

फिर मैंने ही धीरे से मौका देख कर अपने लोड़े का मुँह थोड़ा सा बाहर को निकाल दिया.

मेरे लोड़े का सुपारा अब बाहर झांकने लगा था.

सुपारा एकदम मोटा और लाल था, जिसे देख कर भाभी जी गर्म होने लगीं. वो बार बार मेरे लोड़े की तरफ देखे जा रही थीं.

उन्होंने मुझसे कहा- टेबल पर देख लो … फ़ाइल यहीं होगी, मैं भी ढूंढती हूँ.

मैं टेबल के करीब आया और भाभी जी ने बहाने से लोड़े को टच कर दिया.

जैसे ही ऐसा हुआ, तो मेरा लोड़े फनफना कर खड़ा हो गया.

मेरी पैंट के ऊपर से मेरा मोटा लोड़े साफ दिखने लगा.

तभी भाभी जी वासना से मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- तुम आज शाम को घर आ जाना, मुझे तुमसे कुछ काम है.

मैंने ओके मेम कह कर उन्हें हां कह दी.

मैं ऑफिस के बाद जब भाभी जी के घर गया तो भाभी जी ने चाय बनवाई और बोलीं- आज मेरे सास ससुर घर पर नहीं है, तो तुम यहीं सो जाओ. मुझे अकेले डर लगेगा.

मैं तो इसी मौके की तालाश में था.

रात को जब सोने की बारी आई तो भाभी जी ने मेरा बेड हॉल में लगा दिया और वो अपने कमरे में अन्दर चली गईं.

मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं इधर सोने थोड़े ही आया था.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ कच्छा पहन कर लेट गया.

मैं लोड़े हिलाने लगा और रवीना भाभी जी को याद करने लगा.

करीब 12 बजे भाभी जी उठीं और मेरे पास आकर बोलीं- अरे अभी तक सोये नहीं!

मैंने कहा- मुझे गर्मी लग रही है.

भाभी जी ने बोल दिया कि ओके तुम मेरे बेडरूम में आ जाओ, वहां एसी ऑन है.

मैं कपड़े पहन कर उनके कमरे में जाकर नीचे फर्श पर अपना बिस्तर लगाने लगा.

भाभी जी ने कह दिया-अरे तुम मेरे बेड पर ही सो जाओ, कोई बात नहीं.

बस फिर क्या था.

करीब एक बजे मैंने अपने लोवर को उतार दिया और साइड में रख दिया … और कुछ देर बाद टी-शर्ट भी उतार कर रख दी.

मैंने भाभी जी से पूछा कि आपको प्रॉब्लम नही हो, तो मैं क्या ऐसे सो सकता हूँ!

भाभी जी हल्के से मुस्कुरा कर बोलीं- हां सो जाओ.

करीब 1.30 बजे जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने हिम्मत करके अपना एक पैर भाभी जी के पैर से टच किया.

उन्होंने कुछ भी रियेक्ट नहीं किया.

मैं ऐसा ही सोया रहा, इसके आगे मैंने कुछ नहीं किया.

फिर भाभी जी ने मेरी तरफ करवट ली और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रख दिया.

मैं ऐसे रियेक्ट कर रहा था कि मैं नींद में हूँ.

जब थोड़ी देर हुई, उसके बाद मैंने देखा भाभी जी कुछ नहीं कर रही हैं तो मैंने अपना लोड़े कच्छे से बाहर निकाल दिया.

एक दो मिनट बाद मैंने भाभी जी का हाथ धीरे से उठा कर अपने लोड़े पर रख दिया.

भाभी जी भी जग रही थीं.

उन्होंने थोड़ी देर बाद मेरे लोड़े को हल्के से दबा दिया.

जैसे ही भाभी जी ने लोड़े को दबाया तो वो खड़ा हो कर अपनी औकात में आ गया.

मेरा 7 इंच का लोड़े अपने पूरे आकार में आ गया था.

भाभी जी खड़ा लोड़े देख कर पूरी गर्म हो गईं.

मैं उस समय भी सोने का नाटक कर रहा था. लेकिन अंदर ही अंदर में भाभी जी को चोदना शुरु कर चुका था.. बहुत बुरा वाला.

फिर कुछ पल बाद मुझे मेरे लोड़े पर भाभी जी की हल्की हल्की सांस महसूस होने लगी.

मैंने थोड़ी सी आंख खोल कर देखा तो भाभी जी का मुँह मेरे लोड़े के पास था.

उसी समय मैंने ऐसी करवट ली कि मेरा लोड़े उनके होंठों से छू गया.

अब भाभी जी अपने आपे से बाहर हो गई थीं, उन्होंने मेरा लोड़े मुँह में ले लिया. झप्पटा मारते हुए उन्होनें मेरे लोड़े पर धावा बोल दिया.. और तड़पती हुई मछली की तरह

लोड़ा ऐसे चूसने लगीं जैसे आज के बाद दुनिया खत्म हो जाएगी ये आखिरी सेक्स होगा उनकी लाईफ का..

मैं अचानक से उठा और भाभी जी की तरफ देखा तो भाभी जी को देखता रह गया.

उन्होंने मुझसे एक भी शब्द नहीं बोलने दिया और ऐसे लोड़े चूसने लगीं जैसे बड़े दिनों से लोड़े की प्यासी हों.

मैंने अपने एक हाथ से भाभी जी की साड़ी उठाई और उनकी गांड तक चढ़ा दी.

फिर धीरे से उनकी पैंटी में हाथ डाल कर उनकी गांड के छेद में एक बार में ही अपनी मेरी उंगली डाल दी.

वो धीरे से चिल्लाईं- आउँछ … और कुछ डालो … उंगली नहीं.

ये कह कर भाभी जी मेरे लोड़े को पूरी शिद्दत से चूसने लगीं.

अब खेल खुल चुका था.

करीब पांच मिनट तक लोड़े चुसवाते हुए हो गए थे.

मैंने भाभी जी को सीधा लेटा दिया और 69 की पोजीशन बना ली. वो मुझे और मैं उन्हें चूसने लगा.

हम दोनों कुछ मिनट तक लोड़े चुत चूसते रहे.

मैं उनके मुँह में ही झड़ गया और भाभी जी ने लोड़े रस चूस लिया.

कुछ पल बाद भाभी जी भी झड़ गईं और मैंने भी उनकी चुत चाट कर साफ़ कर दी.

हम दोनों एक एक बार झड़ चुके थे.

भाभी जी मुझे अपनी बांहों में भर कर चूमने लगीं मैं भी उनके मम्मों को चूसने लगा.

दस मिनट बाद हम दोनों फिर से तैयार हो गए.

भाभी जी ने खुद की चूत फैला दी और चित लेट गईं.

मैंने भी उनकी टांगों के बीच आकर अपनी पोजीशन बना ली.

फिर अपने लोड़े पर थूक लगाकर मैंने एक ही झटके में लोड़े चुत में डाल दिया.

एकदम से लोड़े पेल देने से भाभी जी की चूत चित सी गई.

वो कराह उठीं. चुदती तो वो थी लेकिन आज कई दिनो बाद चुद रही थीं,,

मगर मैंने ध्यान न देते हुए उन्हें धकापेल चोदना शुरू कर दिया.

मैं जोर जोर से झटके मारने लगा.

वो दर्द से चिल्ला उठीं मगर कुछ ही झटकों के बाद भाभी जी भी चुदाई का मजा लेने लगीं.

मेरी दस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई से भाभी जी कांपने लगीं, उनकी चूत से पानी पेशाब सब एक साथ बाहर आने लगा था.

वो झड़ कर बहुत कमजोर और निढाल हो गई थीं और पूरी तरह से चुद गई थीं.

वो मुझसे रुकने के लिए बोलीं.

मैं रुक गया और लोड़े चुत से निकाल कर मैंने उन्हें पलटा दिया.

मैंने भाभी जी की गांड के छेद में मुँह लगा दिया.

गांड चाटने से भाभी जी फिर से आवाजें करने लगीं.

तभी मैंने लोड़े भाभी जी की गांड में पेल दिया. भाभी जी लोड़े गांड में लेते ही मानो पागल हो गईं.

दर्द से उनकी चीखें मेरे लोड़े को सुकून दे रही थीं.

कुछ ही देर में भाभी जी पसीने से नहा गईं. उनकी कमर में दर्द होने लगा.

वो बहुत थक गई थीं इसलिए उनकी कराहें कुछ तेज हो गई थीं.

भाभी जी के मुँह से निकला- आंह अब रहने दो … मैं मुँह से कर देती हूँ.

मैंने अपना लोड़े उनके मुँह में लगा दिया और भाभी जी लोड़े चूसने लगीं.

दो मिनट बाद मैंने अपने लोड़े का पानी उनके मुँह में छोड़ दिया और उनके बाजू में गिर गया.

कुछ देर बाद जब भाभी जी ठीक हुईं तो बोलीं- ये चुदाई मैं जिंदगी भर याद रखूंगी … सच में आज मुझे चुदाई में मजा आ गया. अब से तुम जॉब के साथ-साथॉ

मुझे चोदने का काम भी करोगे.. चाहो तो इसके पैसे अलग ले लेना.. मुझे तुम्हारा लंड चाहिए..

मैनें भी हां कर दी.. चूत भी और पैसे भी मेरे तो मौज आ गई.