भाभी को इतना चोदा की चूत सुजा दी…

मैं भाभी जान की साड़ी को ऊपर उठाने लगा. भाभी जान कुछ नहीं बोलीं तो मैं भी समझ गया कि भाभी जान अब फुल जोश में हैं और अब इनका भी मन चुदवाने को कर रहा है.

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4/27/20261 min read

मेरा नाम राहुल है. मैं मध्यप्रदेश के सतना का रहने वाला हूं.

यह घटना मेरे साथ पड़ोस में रहने वाली एक भाभी जान के साथ घटी थी.

भाभी जान का नाम प्रिया था और वो दिखने में बहुत हॉट माल थीं.

प्रिया भाभी जान का फिगर बड़ा ही कामुक था.

उनकी साईज 38-36-40 की थी.

भाभी जान की चुचियां बहुत बड़ी थीं और गांड तो इतनी भारी थी कि बुड्ढों के लंड में भी फुरफुरी आ जाए.

जवान लौंडों का लंड तो भाभी जान को देखते ही खड़ा हो जाता था.

भाभी जान हाईट 5 फुट 4 इंच की थी और उनकी मतवाली चाल इतनी गजब थी कि क्या कहूँ. भाभी जान एक बार किसी को देख कर बस जरा सा मुस्कुरा दें तो इस बात की गारंटी थी कि उसका पानी तुरंत निकल जाएगा.

आज से दस साल पहले मैं अपनी जवानी पर कदम रख ही रहा था.

उस समय मेरी उम्र 17 साल की हुई ही थी, मेरा लंड अपने पूरे उफान पर था.

मैं आती जाती लौंडियों और भाभियों को देख कर गर्म आहें भरता रहता था और मेरा लंड भी किसी मस्त चुत की खोज में लगा हुआ था.

उस समय मेरे पड़ोस में रहने वाली प्रिया भाभी जान की नई नई शादी हुई थी.

कुछ समय बाद मुझे जानकारी मिली कि भाभी जान का पति भाभी जान को सन्तुष्ट नहीं कर पा रहा था.

वे भी एक नए लंड की तलाश में भटक रही थीं.

मेरी भाभी जान से बातचीत होने लगी थी. कुछ ही दिनों में भाभी जान मुझसे खुल कर हर तरह की चर्चा करने लगी थीं.

सेक्स के ऊपर भाभी जान से खुल कर चर्चा होने जब शुरू हुई थी तभी भाभी जान ने दबी जुबान में अपने पति से चुदाई में असंतुष्ट होने की बात कही थी.

उनके चेहरे पर छाई उदासी का कारण भी मुझे साफ़ समझ आने लगा था.

कुछ ही दिनों में भाभी जान और मेरी बहुत अच्छी बनने लगी थी क्योंकि मैं खुले विचारों वाला बंदा हूं.

मैं भाभी जान से खुल कर मजाक करता था. वो भी मुझसे खुलकर मजाक करती थीं.

कुछ दिनों में ही हम लोगों का मजाक खुल कर चलने लगा था. अब हमारी बातें लंड चूत तक पहुंच गईं थी. गजब लेवल तक

एक दिन शाम को मैं भाभी जान के घर गया.

उस दिन भाभी जान के घर पर कोई नहीं था, भाभी जान अकेली ही घर पर थीं.

मैं पहुंचा तो मैंने भाभी जान से पूछा कि भाभी जान आज घर पर कोई दिखाई नहीं दे रहा क्या बात है … कहां चले गए सारे लोग?

भाभी जान बोलीं- आज सारे लोग रिश्तेदार के यहां गए हुए हैं. वहां पर आज मुंडन समारोह है. इसलिए सारे लोग गए हैं.

मैंने पूछा- क्या भैया भी गए हैं?

भाभी जान ने मुँह बना कर कहा- हां वो भी गए हैं …. तुम वो सब छोड़ो आओ बैठो. वो होते भी तो क्या उखाड़ लेते.

मैं हंस दिया.

फिर भाभी जान ने मुझसे बैठने का कहा तो मैं बैठ गया और भाभी जान से बात करने लगा.

बात शुरू हुई तो मैं भाभी जान से मजाक करने लगा.

मैं भाभी जान से बोला- आज रात तो आपको अकेले सोना पड़ेगा, आज भैया तो है नहीं. फिर आपकी चुदाई कैसे होगी? क्या आप अपनी उंगली से अपनी चुत की आग को शांत करोगी?

मैंने मजाक में कहा था मगर इस पर भाभी जान ने जो जवाब दिया, उसको सुनकर मैं हैरान रह गया.

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूं.

उन्होंने मुझसे कहा- तो क्या हुआ, आज रात तुम मेरी चुदाई कर लेना.

यह सुनकर मैं एकदम से चौंक गया. मैंने जैसे-तैसे अपने आपको कंट्रोल किया.

मैंने बहुत शालीनता से जवाब दिया- भाभी जान मैंने अभी तक चुत नहीं चोदी है. मुझे पता ही नहीं है कि चुत की चुदाई कैसे की जाती है.

मेरे इतना कहते ही भाभी जान बहुत जोर से हंसने लगीं और बोलीं- तुम इतने बड़े हो गए हो. अभी तक तुमने चुदाई नहीं की … क्या तुम्हारा खड़ा नहीं होता?

मैंने कहा- भाभी जान खड़ा तो होता है मगर मुझे आप जैसी कोई मिली ही नहीं, जिसके साथ मैं चुदाई कर सकता.

भाभी जान हंस कर बोलीं- अच्छा … तुम्हें मुझमें ऐसा क्या ख़ास लगा?

मैं कहा कि आपके बूब्स बहुत बड़े और एकदम गोल हैं, आपकी गांड तो और भी भारी है. मेरा मन तो करता है कि आपके मम्मों का सारा दूध निचोड़ कर पी जाऊं और आपकी गांड को मसल मसल कर लाल कर दूं.

भाभी जान मेरी तरफ वासना भरी नजरों से देखने लगीं.

मैंने भी मौका देखकर चौका मारा और अगले ही पल मैंने भाभी जान के कोमल और दूध जैसे सफेद दूध को अपने एक हाथ से मसल दिया.

इससे भाभी जान को थोड़ा दर्द हुआ और वो बहुत ही प्यार से ‘ओह मर गई … आह …’ कह कर शांत हो गईं.

मैंने उन्हें मस्ती से देखा और पूछा- क्या हुआ?

भाभी जान बोलीं- यार तुमने तो एकदम से और बहुत जोर से मेरे बूब को दबा दिया था. मैंने तो सोचा कि इसको तुम अभी के अभी उखाड़ ही लोगे.

मैंने कहा- अरे भाभी जान इतने कमजोर थोड़ी हैं आपके दूध!

भाभी जान हंस कर बोलीं- अगर उखड़ जाता … तो फिर तुम्हारे भैया क्या दबाते?

मैंने कहा- अरे नहीं भाभी जान … मैं तो बस चैक कर रहा था कि आपके दूध कैसे हैं.

भाभी जान- तो फिर क्या चैक किया?

मैं- भाभी जान आपके दूध सच में बहुत मुलायम हैं. मेरा तो मन कर रहा है कि आज पूरी रात इनको दबाता रहूँ और आपका सारा दूध पी जाऊं.

भाभी जान मुस्कुराने लगीं.

उस समय रात के आठ बज रहे थे. घर पर हम दोनों के अलावा और कोई नहीं था.

मैंने भाभी जान से कहा- भाभी जान आज घर में कोई नहीं है. आप कहो, तो आपके दूध को एक बार और दबा कर मजा ले लूं!

इस पर भाभी जान मना करने लगीं लेकिन मेरे जोर देने पर भाभी जान मान गईं और मैंने एक पल भी जाया न करते हुए भाभी जान को अपनी तरफ खींच लिया.

मैं फिर से उनके मम्मों को दबाने लगा.

इस पर भाभी जान कराहती हुई बोलीं- आराम से दबाओ ना यार … तुम बहुत जोर से दबा रहे हो.

मैंने बोला- नहीं यार, अब आराम से ही दबाऊंगा … अपनी प्यारी भाभी जान को मैं दर्द नहीं होने दूंगा.

इस पर भाभी जान बहुत खुश हो गईं और मुझे एक प्यारा और छोटा सा किस कर दिया.

फिर भाभी जान बोलीं- तुम मुझे कितना प्यार करते हो.

मैंने कहा- आप इतनी कोमल हो कि आपको हर कोई प्यार करना चाहेगा.

भाभी जान को गर्म करने के दौरान ही मेरा लंड लोवर में तम्बू बन कर खड़ा हो चुका था.

मेरा मन कर रहा था कि कब भाभी जान की साड़ी उठा कर उनकी चुत में अपना लंड घुसा दूँ.

मैं भाभी जान के दूध दबाता रहा और मजे लेता रहा.

इधर मेरे लंड की हालत खराब हो रही थी.

मेरे लंड की हालत भाभी जान चोर नजरों से देख रही थीं और मन ही मन मजे ले रही थीं.

मैं उनके दोनों मम्मों को दबाते हुए बोला- यार, मेरा आपको खूब किस करने को मन कर रहा है. ऐसा लग रहा है कि मैं आपके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे लाल अधरों का रसपान करता रहूँ और आपके अधरों में जितना रस है, सारा पी जाऊं.

इस पर भाभी जान बोलीं- तो कर लो न किस … तुम्हें रोका किसने है.

भाभी जान पूरे जोश में आ गई थीं.

उनके इतना कहते ही मैं भाभी जान पर पागल की तरह टूट पड़ा और उनके होंठों को कायदे से चोदने लगा.

साथ में उनकी दोनों चुचियों को दबाता रहा.

भाभी जान अब पूरी उत्त्तेजना में ‘आह … ऊह … आह ऊह …’ कर रही थीं.

उनकी आवाज तेज तो थी, कमरे के बाहर नहीं निकल पा रही थी.

मैं उन्हें चुम्बन कर रहा था, तो उनके होंठों मेरे होंठों में लॉक थे.

ऐसे करते हुए हम दोनों को आधा घंटा हो गया था.

अब धीरे धीरे मेरा एक हाथ भाभी जान की चुत पर आ गया.

मैं भाभी जान की साड़ी को ऊपर उठाने लगा. भाभी जान कुछ नहीं बोलीं तो मैं भी समझ गया कि भाभी जान अब फुल जोश में हैं और अब इनका भी मन चुदवाने को कर रहा है.

मैंने धीरे से अपनी एक उंगली भाभी जान की चुत में घुसा दी.

इधर मेरे लंड का पानी रिस रिस कर बुरा हाल कर चुका था.

आप लोग सोच सकते हैं कि जिसके पास इतनी सुन्दर और हॉट भाभी जान हो, उसका क्या हाल होगा.

मेरा पूरा अंडरवियर लंड के पानी से भीग चुका था और लंड बहुत देर खड़ा था, तो उसमें दर्द होने लगा था.

जब मैंने भाभी जान की चुत में उंगली की, तो भाभी जान की चुत ऐसी लगी जैसे किसी आग की भट्टी में उंगली डाल दी हो.

सच में भाभी जान की चुत किसी तप्त भट्टी की तरह गर्म थी. मेरे साथ साथ भाभी जान का भी बुरा हाल हो चुका था. बेचारी ढ़ंग से चुद नहीं रहीं थी इतने दिनों से.

वो भैया, पता नहीं लंड था भी उनके पास या नहीं.. इतनी कमाल चूत उनके पास थी लेकिन साला इज्जत ही नहीं.. ऐसी कमसन चूत की..

मैं भाभी जान की चुत में उंगली आगे पीछे करने लगा.

भाभी जान वासना की वजह से ‘आह ऊह आह …’ करती रहीं और मैं अपने काम में लगा रहा.

कुछ मिनट ऐसा करने के बाद भाभी जान कहने लगीं- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है यार … अपना लंड जल्दी से मेरी चुत में डाल दो. मेरी चुदाई जल्दी करो,

नहीं तो तुम्हारे भैया आ जाएंगे. वो बोलकर गए थे कि मैं वहां से रात को वापस आ जाऊंगा और ये बात मैं तुम्हें बताना भूल गयी थी.

तो मैंने कहा- ठीक है.

मैंने सोचा कि लोहा अभी गर्म है, हथौड़ा मार देना चाहिए. समय न गंवाते हुए मैंने भाभी जान को चुदाई की पोजीशन में लिया और अपना लंड निकाल कर सीधा भाभी जान की चुत में पेल दिया.

जैसे ही मेरा लंड भाभी जान की चुत में गया, भाभी जान की चीख निकल पड़ी और वो कराहती हुई मुझसे बोलने लगीं- आंह मम्मी मर गई … निकालो अपना ये हथियार … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

अब बेचारी ढ़ंग से चुद ही नहीं रहीं थी तो उन्हे क्या पता की लंड होता क्या है.. नुन्नी के साथ खेल रहीं थी अब तक.. आज तो असल हथियार के दर्शन हुए उन्हें..

लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी और एक झटका और दे मारा.

मेरा लंड भाभी जान की चुत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया.

भाभी जान की आंखों से आंसू निकलने लगे. वो दर्द के मारे इधर उधर होने लगीं और आहआह आह आह ऊई ऊई की आवाज निकालने लगीं.

मैंने भाभी जान के मुँह पर अपना मुँह रख दिया और उन्हें किस करने लगा.

इससे उनकी आवाज अन्दर ही दब कर रह गई.

मैं कुछ देर बाद भाभी जान की चुत में लंड को तेजी से अन्दर बाहर करने लगा.

अब भाभी जान भी लंड का मजा लेने लगी थीं.

ऐसे ही लगभग बीस मिनट तक भाभी जान की चुत चुदाई चलती रही.

मैंने उन्हें कई आसनों में चोदा.

इस दौरान भाभी जान बार बार झड़ रही थीं. बाद में मैं भी उन्हीं की चुत में झड़ कर उनके ऊपर ही लेट गया.

उन्होंने मुझे बताया कि कितना देर तक चोदा तुमने … मालूम मैं कई बार झड़ चुकी हूँ और तेरा लंड झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.

अभी मेरा पानी भाभी जान की चुत से रह रह कर टपक रहा था.

भाभी जान वैसे ही टांग फैलाए लेटी रहीं और मैं भी भाभी जान के ऊपर लेटा रहा.

हम दोनों बातें करते रहे.

मैंने भाभी जान से पूछा- मजा आया या नहीं!

इस पर भाभी जान बोलीं- तुम तो यार बहुत बड़े चोदू निकले … तुम तो कह रहे थे कि तुमने कभी सेक्स ही नहीं किया और पहली बार में ही मेरी जान निकाल दी.

हम दोनों को बात करते बीस मिनट से ज्यादा हो गया था.

इस बीच मेरा लंड फिर से अंगड़ाई लेने लग गया था.

मैंने भाभी जान से कहा- भाभी जान एक बार और करते हैं.

भाभी जान मना करने लगीं.

मैंने बहुत कहा लेकिन उन्होंने मेरी एक ना सुनी.

भाभी जान कहने लगीं कि दो दिन बाद पड़ोस के गांव में शादी है. सब लोग शादी में जाएंगे, मैं जाने से मना कर दूंगी. उस दिन घर में कोई नहीं रहेगा,

तुम जितना मर्जी उतना कर लेना, लेकिन आज नहीं. उस दिन मैं पूरी रात तुम्हारे साथ रहूंगी, जो मर्जी वो कर लेना … लेकिन आज मान जाओ.

अभी तुम्हारे भैया आने ही वाले होंगे. तुम जल्दी से कपड़े पहनो और जाओ.

मैंने कहा- ठीक है, दो दिन बाद मिलते हैं.

भाभी जान बोलीं- ठीक है.

मैं कपड़े पहनकर जैसे ही अपने घर पहुंचा, भैया भी आ गए. पता नहीं भाभी जान कपड़े पहन पाई थीं या नहीं.

फिर मैं दो दिन बाद का इंतजार करने लगा, जिस दिन पड़ोस के गांव में शादी थी.

वो दिन भी आ गया और उस रात भाभी जान मेरे साथ थीं.

उस रात मैंने भाभी जान को बहुत चोदा. इतना चोदा कि भाभी जान की चूत में सूजन आ गई.

भाभी जान ने भैया से एक हफ्ते तक अपनी चुत नहीं चुदवाई.

एक हफ्ते तक भाभी जान ठीक से चल नहीं पा रही थीं.

आठवें दिन भाभी जान मुझसे मिलीं, तब मैंने पूछा- उस दिन मजा आया?

भाभी जान बोलीं- मजा तो बहुत आया लेकिन मेरी चुत में सात दिन तक दर्द था.

मैंने कहा- मेरे लंड को लेती रहोगी भाभी जान, तो आदत हो जाएगी.

भाभी जान बोलीं- हां ये तो है.

तब से लेकर अभी तक मैं भाभी जान चोदता आ रहा हूं. अब तो वो मेरी परमानेंट रंडी बन चुकी हैं.. जब मन करा चीनी लेने जाओ.. गांड सहलाकर आ जाओ.. किस कर आओ

चूत सहलाओ..