भाई और उनके दोस्त ने मिलकर खेत में चोदा

वो दोनों मुझे सैंडविच बना कर चोदने लगे. दस मिनट तक चोदने के बाद भाई मेरी गांड में झड़ गए. इधर विकास मेरी चुत का भुर्ता बनाए जा रहा था.

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4/27/20261 min read

हैलो फ्रेंड्स … मेरा नाम रुखसार है और मेरे भाई का नाम इमरान है.

मेरे पिता किसान हैं. इमरान बाहर पढ़ता है और मैं यहीं गांव में पढ़ती हूँ.

हुआ यूं कि मेरा भाई ईद में घर आया हुआ था और कुछ दिन बाद लॉक डाउन लग जाने के कारण यहीं गांव में रह गया. हम दोनों एक ही कमरे में सोते हैं, सिर्फ बेड अलग थे. एक दिन रात को मेरी आंख खुली, तो मैंने भाई को देखा कि वो किसी से फोन पर बात कर रहा है और लोड़े सहला रहा है. उसका लोड़े बहुत मस्त था. मेरा मन कर रहा था कि अभी उस पर कब्जा कर लूं. उस समय मुझे बड़ी तेज नींद आ रही थी इसलिए मैं सो गई.

दूसरे दिन मैंने सोचा भाई के लोड़े का स्वाद लिया जाए. मैं प्लान बनाने लगी कि कैसे भाई से चुत की सेवा करवाई जाए. मैं धीरे धीरे भाई को अपना शरीर दिखाने लगी. भाई भी मेरी चुचियों और गांड को देखने लगे थे. मैं समझ गई थी कि भाई मुझे चोदने की नजर से देखने लगे हैं.

चूँकि हम दोनों भाई बहन एक दूसरे से काफी खुल कर बात कर लेते हैं और मैं अपने भाई के सामने अपने कपड़े भी बदल लेती हूँ. एक दिन रात को भाई ने मेरे सामने अपना लोअर उतार दिया और एक छोटी सी फ्रेंची में अपने फूले हुए लोड़े को दिखाते हुए पूछने लगे- देख मेरी ये नई वाली फ्रेंची कैसी लग रही है?

मैंने कहा- फ्रेंची तो बहुत ही सुंदर है लेकिन आपके उसके हिसाब से कुछ छोटी लग रही है.

ये कह कर मैं हंसने लगी. मेरा मन भाई के लोड़े को पकड़ने का कर रहा था पर मन मसोस कर रह गई. भाई भी हंसने लगे. फिर मैं भाई से बोली- भाई मेरा शरीर दुख रहा है, क्या आप मेरी थोड़ी मालिश कर देंगे! मैंने नाइटी के अन्दर सिर्फ पैंटी ही पहनी थी, ब्रा नहीं पहनी थी.

भाई बोले- ठीक है, जाओ तेल गर्म कर लाओ, अभी करे देता हूँ.

मैं मालिश के लिए तेल गर्म करके ले आई.

भाई- कहां कहां दर्द है?

मैं- पूरा शरीर दुख रहा है.

भाई- तब तो तुमको नाइटी निकालनी पड़ेगी.

मैं- मैंने ब्रा नहीं पहनी है.

भाई- तो क्या हुआ … ये तो और अच्छा है … मालिश करने में दिक्कत नहीं होगी.

मैं- पर आपके सामने कैसे!

भाई- तब कैसे मालिश करवाओगी. बिना कपड़ा निकाले तो मालिश होगी नहीं.

मैं- ठीक है, पर आप किसी से बोलिएगा नहीं.

भाई- ठीक है, किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.

मैंने भाई की तरफ पीठ की … और नाइटी उतार कर पेट के बल लेट गई. मैं अपने भाई के सामने सिर्फ पैंटी में थी, वो भी नाम की पैंटी थी … सिर्फ एक धागा वाली, जिससे चुत की फांकें ही ढकी थीं. मैंने देखा कि भाई का लोड़े फिर से तनने लगा था. लोड़े देख कर मुझे मजा आने लगा. भाई ने मेरी पीठ पर तेल गिराया, गांड पर और पैरों पर … फिर हाथ से मालिश करने लगे.

भाई- तुम्हारा शरीर तो बड़ा मस्त है, एकदम मुलायम लग रहा है.

मैं- हां भाई मैं मस्त क्यों नहीं होऊंगी … मेहनत भी तो करती हूँ.

भाई मेरी पिछाड़ी की मालिश करने लगे.

भाई- वाह … क्या मस्त गांड है तेरी … मगर मुझे तेरी गांड का छेद इतना बड़ा क्यों लग रहा है!

मैं- कुछ नहीं भाई, मुझे पता नहीं कैसे है ये तो इतना ही होता होगा.

भाई- मैं तेरी पैंटी हटा देता हूँ, डिस्टर्ब कर रही है.

मैं- ठीक है.

भाई ने मेरी पैंटी खींच कर अलग फैंक दी.

अब मैं अपने भाई के सामने पूरी नंगी पड़ी थी.

मुझे अन्दर से बड़ी सनसनी हो रही थी.

तभी भाई ने काफी सारा तेल मेरी गांड के छेद पर गिराया और कसके दबाते हुए मेरी गांड के छेद तक हाथ से मसलने लगे.

फिर धीरे से उन्होंने मेरी गांड में एक उंगली डाल दी.

मुझे मजा आने लगा.

मैंने अपनी गांड फैला दी और वो मेरी गांड को उंगली से चोदने लगे.

मैं ‘अअह हहहहह उम्म …’ करने लगी.

मुझे भी अपनी गांड में अपने भाई से उंगली करवाने में मजा आने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने मुझसे सीधे लेटाया और मेरे मम्मों पर तेल गिराने लगे.

मैं भाई की आंखों में देख रही थी और वो मेरी चुचियों को देख रहे थे.

उनका लोड़े एकदम हार्ड हो गया था.

तभी भाई ने अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर लगा दिए और कस कसके मसलने लगे.

मेरी आह आह निकलने लगी.

मैंने उनसे पूछा- भाई मेरे दूध कैसे हैं?

भाई- वाह मेरी बहन तेरी चूचियां काफी भरी हुई हैं. मुझे लग रहा है कि तुमने जरूर किसी से अपने शरीर की सेवा करवाई है.

मैं- हां भाई, मैं आपके दोस्त विकास से बहुत चुदी हूँ.

भाई- विकास … वो साला हरामी का बच्चा, भैन के लोड़े ने तुझे चोदा है. उसकी तो माँ की चुत … साले को आज बताता हूँ.

मैंने कहा- भाई, आप मेरी मालिश पर ध्यान दो न … मुझे आपसे अपनी चूचियां मिंजवाने में बड़ा अच्छा लग रहा है.

भाई ने मेरी चुचियों के निप्पल अपनी उंगलियों के बीच दबा कर मसलना शुरू कर दिया.

मेरी कामुक आवाजें निकल रही थीं. मैंने भाई की आंखों में देखा और अपने हाथ से अपने एक दूध की टौंटी पकड़ कर इशारा किया.

भाई समझ गए और उन्होंने मेरे दूध की टौंटी को अपने होंठों में दबा लिया.

मैं मस्त होने लगी और अपने भाई के सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी.

फिर भाई मेरी चुत की मालिश भी करने लगे. मैंने टांगें फैला दीं तो वो धीरे धीरे चुत में उंगली करने लगे.

मैं अपनी गीली चुत में अपने भाई की उंगली पाकर निहाल हो गई और मेरे मुँह से तेज तेज स्वर में मादक सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म भाई आंह मर गई आंह उम्म्म!

भाई अब बहुत तेज तेज अपनी उंगली से मुझे चोदने लगे.

लगभग 10 मिनट में मैं झड़ गई.

तभी भाई ने अपने कपड़े निकाल दिए और वो पूरे नंगे हो गए.

उनका मोटा लम्बा लोड़े मेरी आंखों में चुदाई की खुमारी भरने लगा.

मैं अपने भाई का लोड़े देखने लगी.

तभी भाई लोड़े हिलाते हुए बोले- ले बहन चूस ले..

सच में भाई का लोड़े रॉकेट जैसा लंबा था और मोटा भी … ये काफी लंबा और 2.5 इंच मोटा हथियार था.

मैं लोड़े चूसने को बेताब थी.

मैंने अपने भाई के लोड़े को मुँह में ले लिया और मस्ती से लोड़े चूसने लगी.

भाई आंख बंद करके मजे लेने लगे.

थोड़ी देर बाद भाई ने आंख खोली और मेरा सर पकड़ कर मुँह चोदने लगे.

मेरी सांसें अटकने लगी थीं, पर भाई चोदे जा रहे थे. उनका लोड़े मेरे कंठ तक जा रहा था.

बीच बीच में पूरा लोड़े घुसा कर भाई रुक भी जाते थे, जिसके कारण मेरी सांस भी फूल जाने लगी थी और मेरी आंखों से आंसू भी बहने लगे थे.

दस मिनट तक मेरा मुँह चोदने के बाद भाई ने मेरे सर को अपने लोड़े पर पूरा दबा दिया.

मैं हटने की कोशिश करने लगी, पर भाई ने हटाने ही नहीं दिया.

मेरी सांस रुक गई थी, भाई का लोड़े मेरे कंठ में फंसा था.

फिर भाई मेरे सर को दबाते हुए कंठ में ही अपना माल झाड़ दिया, तभी लोड़े बाहर निकाला.

मेरी नाक से भी लोड़े का माल निकल रहा था. मैं खाँसने लगी.

थोड़ी देर बाद मैं थोड़ी नार्मल हुई. मेरा पूरा शरीर तेल से चिपचिप कर रहा था.

भाई बाजू के बिस्तर में निढाल पड़े थे.

कुछ देर बाद नहायी, भाई भी मेरे साथ नहाये.

फिर हम दोनों साथ में नंगे ही लेट गए.

उस रात भाई ने मेरे दूध खूब चूसे और मेरी चुत में उंगली डाली. मगर चुदाई नहीं हुई.

सुबह मैं उठी तो भाई मेरे बगल में नहीं थे.

मैंने उठ कर मुँह धोया, नाश्ता किया, तब तक भाई आ गए.

उनके साथ में विकास भी था. मुझे देख कर वो दोनों हंस रहे थे.

मैंने भी कातिल हंसी बिखेर दी.

उस दिन पापा कहीं बाहर जाने वाले थे. इसलिए पापा भाई से बोले कि खेत चले जाओ और उधर काम काज देख लेना. मैं कल आऊंगा.

भाई बोले- ठीक है.

पापा चले गए.

लगभग 12-1 बजे भाई ने मम्मी से कहा- मैं खेत जा रहा हूँ और रुखसार को भी साथ ले जा रहा हूँ.

मम्मी बोलीं- ठीक है.

फिर भाई और मैं खेत की चुदाई का मजा लेने चल दिए.

रास्ते में विकास भी मिल गया और हम तीनों खेत पहुँच गए.

खेत के बीच में एक छोटी सी झोपड़ी बनी है.

भाई बोले- चलो. पहले खेत घूम आते है.

विकास बोला- हां चलो.

खेत में पानी लग रहा था.

फिर घूमते घूमते एक जगह मैं न जाने कैसे नाले में गिर गई, मेरा पूरा शरीर गंदगी से खराब हो गया.

विकास और भाई ने मिलकर मुझे निकाला. विकास बोला- अब तो तुमको नहाना पड़ेगा.

भाई बोले- हां चलो बोर के पानी में नहा लो.

मैं बोर के पास गई और गड्डे में उतर कर नहाने लगी.

विकास और भाई खड़े होकर मुझे देखने लगे. फिर भाई और विकास भी उसी गड्डे में आ गए.

भाई मेरे आगे आ गए और विकास पीछे से आकर मुझसे सट गया.

विकास का लोड़े मेरे गांड पर लग रहा था.

मुझे पता चल चुका था कि आज मेरी दोनों तरफ से फटने वाली है.

भाई ने मेरी चुत पर हाथ सटा दिया और मसलने लगे.

इधर विकास अपना लोड़े मेरी गांड में सटा कर मेरे बूब्स मसलने लगा.

वो दोनों मुझे किस करने लगे. मेरे गालों पर, पीठ पर, होंठ पर, बूब्स के ऊपर छाती पर उन दोनों के होंठ चलने लगे.

अब तक मेरी चुत भी गीली हो चुकी थी.

फिर भाई बोले- चलो झोपड़ी में चलते हैं.

हम सब झोपड़ी में आ गए.

मैं चुदने के लिए अधीर हो रही थी.

विकास बोला- पहले तुम दोनों अपने अपने कपड़े निकाल कर मुझे दो, मैं बाहर धूप में बिखेर देता हूँ. जब तक हम यहीं रुकते हैं, तब तक कपड़े सूख जाएंगे.

भाई ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसे दे दिए, विकास भी नंगा हो गया.

वो मुझसे बोला- तुम भी अपने कपड़े दे दो.

मैं भी नंगी हो गई और अपने कपड़े विकास को दे दिए.

विकास बाहर कपड़े सूखने के लिए पसार आया.

दोनों के लोड़े पूरे खड़े थे. दोनों के लोड़े लगभग एक से ही लम्बे थे लेकिन भाई का लोड़े कुछ ज्यादा मोटा था.

विकास का लोड़े भी कम नहीं था, वो बस थोड़ा सा ही पतला था.

दोनों के लोड़े काफी बड़े और खतरनाक मूड में दिख रहे थे.

फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे खूब किस किया. मेरी चुत भी चाटी.

लगभग 10 मिनट के बाद विकास मुझसे बोला- ले रंडी, अब चूस मेरा हथौड़ा.

उसने मुझे घुटनों के बल बिठा दिया और मेरे मुँह में लोड़े घुसा दिया.

तभी भाई भी बोले- एक बार मेरा लोड़े भी चूस दे.

वो दोनों अपना अपना लोड़े मेरे मुँह के सामने हिलाने लगे.

मैं बारी बारी से दोनों का लोड़े चूसने लगी.

कुछ मिनट तक मैं दोनों के लोड़े चूसती रही.

मेरे मुँह से लोड़े चूसने से लार बह रही थी, जिसके कारण मेरे बूब्स पूरे गीले हो गए.

मेरे नाक से भी लोड़े का रस बहने लगा था.

विकास मेरे बूब्स को मसलने लगा.

थोड़ी देर बाद भाई बोले- विकास तू मेरी बहन का मुँह चोद, मैं इसकी गांड मारता हूँ.

विकास ने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरा सर पकड़ कर आगे से लोड़े डाल कर मेरा मुँह चोदने लगा.

दूसरी ओर भाई ने मेरी गांड पर लोड़े लगाया और एक ही धक्के में पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुसा दिया.

मेरी चीख निकल गई लेकिन मुझे विकास के लोड़े से गांड मराने की आदत थी तो मैं अपने भाई का लोड़े झेल गई.

भाई हंस कर बोले- वाह रे मेरी रंडी, तेरी तो गांड भी पूरी खुली है.

विकास- क्यों नहीं खुली होगी यार … मैंने पूरे 2 साल से तुम्हारी बहन को चोद रहा हूँ.

मैं आवाज निकाल रही थी- उंगग्ग … उम्म ऊन्ग्घ!

मेरे मुँह में विकास का लोड़े चल रहा था इसलिए मैं ठीक से आवाज नहीं निकाल पा रही थी.

इस गुंग गुंग के सिवाए कुछ नहीं बोल पा रही थी.

इस समय मैं मुँह और गांड दोनों तरफ से ठुक रही थी.

थोड़ी देर में विकास मेरे मुँह में ही झड़ गया.

मैं उसके लोड़े का सारा माल गटक गई.

फिर कुछ मिनट विकास बैठ कर मेरी गांड चुदाई देखने लगा.

उसका लोड़े धीरे धीरे खड़ा होने लगा.

इधर भाई मुझे चोदे जा रहे थे और मैं मजे से सिसकारी लेती हुई चुद रही थी.

कुछ देर बाद विकास उठा और बोला- ले रंडी, मेरे लोड़े को फिर से थोड़ा सा चूस, फिर मैं तेरी चुत चोदूंगा.

मैं विकास का लोड़े चूसने लगी.

इसके बाद उन दोनों ने मुझे खड़ा किया.

विकास ने मेरी चुत में अपना लोड़े डाल दिया और उधर गांड में भाई का लोड़े घुस गया था.

उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदना चालू कर दिया.

वो दोनों मुझे सैंडविच बना कर चोदने लगे.

दस मिनट तक चोदने के बाद भाई मेरी गांड में झड़ गए.

इधर विकास मेरी चुत का भुर्ता बनाए जा रहा था.

मैं उसके लोड़े से मजे से चुत चुदवा रही थी.

मेरे मुँह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं.

विकास को अब दस मिनट हो चुके थे.

मैं भी झड़ने वाली थी.

फिर देखते ही देखते मैं झड़ गई.

मैंने विकास को अपनी चुत से हटाने की कोशिश की पर वो मादरचोद हट ही नहीं रहा था.

मैं बोली- मेरा मुँह चोद लो साले … अब चुत को छोड़ दे कमीने.

तब उसने मुझे छोड़ा और मुझे घुटनों के बल बिठा कर अपना लोड़े मेरे मुँह में डाल दिया.

वो मेरा मुँह चोदने लगा.

कुछ मिनट में वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और मैंने विकास के लोड़े का सारा माल पी लिया.

अब तक हमारे कपड़े भी सूख गए थे, तो सबने अपने अपने कपड़े पहने और घर चले आए.

उसके बाद हम तीनों को जब भी मौका मिलता तो हम तीनों धकापेल चुदाई का मजा ले लेते हैं. भाई तो लगभग रोज ही मेरी चुत और गांड बजाते हैं.