छोटी बहन को जबरदस्ती नंगा कर दिया
मैं उसको पकड़ के सीधा किस करने लगा और उसके बूब दबाने लगा. बाद में मैंने उसका गाउन निकाल दिया. वो मेरे सामने केवल ब्रा और पेंटी में रह गई थी. मैंने उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके मम्मों को चूसने लगा. वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए मज़े ले रही थी. इस बार वो भी चुदने के पूरे मूड में था..
FAMILY SEX
Unknown
4/23/20261 min read
मेरा नाम सुमीत है. मैं नासिक का रहना वाला हूँ. मैं शादीशुदा हूँ और मेरे दो बच्चे हैं. मेरी उम्र 35 साल है. मेरी बहन का तलाक़ हो चुका है और वो हमारे साथ ही रहती है. उसकी उम्र 33 साल है. मेरी बहन का नाम संध्या है.
हमारे घर में दो कमरे हैं. एक कमरे में मेरा परिवार सोता है और दूसरे रूम में मेरी छोटी बहन सोती है.
एक दिन ऐसे हुआ कि मेरी बीवी और बच्चे मेरी ससुराल में छुट्टियों में गए हुए थे. घर में मैं और मेरी बहन हम दोनों ही थे.
हमारा पहला दिन तो नॉर्मल ही गया. दूसरे दिन जब मैं ऑफिस से घर आया था, तो मेरी बहन शाम के खाने का इंतजाम कर रही थी. मैं फ्रेश होने बाद आया, हम दोनों ने खाना खाया. खाना खाने टाइम अचानक इत्तफाकन मुझे मेरी बहन के मम्मों के दर्शन हो गए. वो कोई चीज परोसने के लिए झुकी, तो उसके गहरे गले से मुझे उसकी चूचियों के दीदार हो गए. मेरे देखने के बाद भी उसने अपने मम्मे छिपाने की कोई कोशिश नहीं की. इससे मुझे बड़ी चुदास सी जाग उठी.
मैं खाना खाने के बाद अपने कमरे में गया और थोड़ी देर रुकमे के बाद रात करीब 11 बजे अपनी बहन के कमरे गया और टीवी चालू करके सीरियल देखने लगा. टीवी की आवाज़ सुन कर वो भी उठ गई और बैठ कर टीवी देखने लगी.वो मुझे बड़ी अजीब सी निगाहों से देख रही थी. बड़ी हिम्मत करके मैं उससे बात करने लगा.
मैं- संध्या नींद नहीं आ रही क्या?
संध्या- हां!
मैं- मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं.
संध्या- हां बोलो?
मैं- नहीं, कुछ नहीं.
संध्या- अरे भाई बोलो क्या हो गया?
मैं- नहीं तुम किसी को बोल दोगी.
संध्या- भाई ऐसा क्या बोलना चाहते हो कि इतना डर रहे हो. बोलो क्या बोलना चाहते हो.
मैं- ठीक है.. लेकिन तुम एक वायदा करो कि तुम किसी से नहीं बोलोगी और मुझसे नाराज़ नहीं होगी.
संध्या- भाई अब बोलना है, तो बोलो नहीं तो मैं सोने जा रही हूँ.
मैं उसके पास जाके बैठा और उसका हाथ मेरे हाथ में लेकर उससे बोला- संध्या मैं तुमको बहुत चाहता हूँ और मैं तुमसे सेक्स करना चाहता हूँ.
संध्या- भाई, ये तुम क्या बोल रहे हो, तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है?
मैं- हां … पर क्या करूं … मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.
मैंने उसको झटके से अपने बांहों में भर लिया और दबोच के रखा. फिर उसको किस करने लगा.
संध्या- भाई छोड़ो मुझे, ये बहुत ही ग़लत है.
मैं- संध्या कुछ ग़लत नहीं है बहन … तुम्हें अच्छे से मज़ा आएगा.
संध्या- पर भाई …
मैं- अभी कुछ बोल मत.
मैंने उसे उठाया और खड़ा करके उसे किस करने लगा. उसने मेरे बीवी की नाइटी पहनी हुई थी, जिसमें मम्मों के ऊपर एक चैन लगी हुई थी. उधर से बच्चों को दूध पिलाने में आसानी होती थी.
मैंने उसको लगातार किस करता जा रहा था. वो आंख बंद करके खड़ी थी. फिर मैंने उसे सोफे पर बैठाया और उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसके पैर को किस करने लगा.
जैसे ही मैं उसकी जांघ तक पहुंचा, उसने आंख खोल कर बोला- भाई, मेरे को बहुत गुदगुदी हो रही हैं.
मैंने ऊपर जाकर उसके मम्मों के ऊपर की चैन खोल दी और उसके मम्मों को चूसने लगा. वो भी धीरे धीरे वासना भरी सिसकारियां लेने लगी. उसने मेरे सर पर हाथ रखा था. अब मैंने उसको उसके बिस्तर पर लिटा दिया और पूरा गाउन गले तक ऊपर करके उसके दूध चूसने लगा. तभी मेरे को उसकी आवाज़ सुनाई दी- भाई ये ठीक नहीं हो रहा. भाई बहन के बीच यह काम गलत है.
मैं उससे अलग हो गया. उसके बात सुन कर मैं बहुत बुरा फील कर रहा था.मैं उससे माफी मांगने लगा- मुझे माफ़ कर दो बहन, आगे से ऐसा कभी नहीं होगा. लेकिन वो बात ही नहीं कर रही थी. उसने सब कपड़े ठीक किए, बस इतना बोली- ठीक है.
मैं फिर सोने के लिए चला गया. सुबह उसने मेरे से कुछ बात नहीं की. मैं फिर ऑफिस चला गया. दो दिन के बाद मेरे बीवी बच्चे आ गए और सब नॉर्मल चलने लगा.तकरीबन पांच महीने बाद मेरी बीवी दोबारा नासिक गई. वो अपने दादा के घर पर गई थी.
मुझे फिर से बहन के साथ सोने की ख्वाइश जाग गई. मैं तकरीबन रात के एक बजे तक सोचता रहा. फिर हिम्म्त करके मैं रात को एक बजे उसके पास गया और उसके पास बैठ कर मैंने उसे जगाया. संध्या- भाई क्या हो गया, तुम मेरे बिस्तर पर क्यों बैठे हो?
मैं- मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ और प्यार करना चाहता हूँ.
संध्या- भाई नहीं, अभी बहुत रात हो चुकी है.
मैं उसको पकड़ के सीधा किस करने लगा और उसके बूब दबाने लगा. बाद में मैंने उसका गाउन निकाल दिया. वो मेरे सामने केवल ब्रा और पेंटी में रह गई थी. मैंने उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके मम्मों को चूसने लगा. वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए मज़े ले रही थी. इस बार वो भी चुदने के पूरे मूड में था..
संध्या- भाई, धीरे … छाती में बहुत दर्द हो रहा है.
मैं- अरे मज़ा भी तो आ रहा है ना तुम्हें.
संध्या- भाई अब बस करो ना.
मैं- एक बार मुझे तेरे को चोदना है.
संध्या- भाई, हम सही नहीं कर रहे … जो कर चुके हैं, वही बहुत ज्यादा है.
मैं उससे अलग हो गया और किस कर के सोने के लिए चला गया. तब से अभी तक हमारे बीच में इससे ज्यादा कुछ भी नहीं हुआ है. वो मेरे से बात करती है, बूब्स के दर्शन करवा देती है, चुसवा भी लेती है. पर इससे ज्यादा कुछ नहीं. मुझे मालूम है कि उसको भी लंड की जरूरत है, वो भी जवानी की आग में सुलग रही है. लेकिन हम दोनों को ही भाई बहन का रिश्ता एक अनजानी सी डोर से बांधे हुए है. हम दोनों चाह कर भी सेक्स नहीं कर पा रहे हैं.
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