ज़ोया की कड़क चूत औऱ परी की गदरीली गांड VS मेरा लोड़ा- PART-2

मेरे कहते ही उसने पूरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और सहलाने लगी.मैं पागल हो गया मैं उससे मुँह से चूसने के लिए कहने ही वाला था कि वो बोली-

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5/23/20261 min read

पहले पार्ट में आपने देखा की कैसे मेरे और ज़ोया के बीच जबरदस्त चुदाई हुई. और उससे मेरा ब्रेकअप हो गया लेकिन इस बीच मैं और मेरी ज़ोया की कोमन फ्रेंड परी करीब आ गए

पार्ट-2 शुरू करने से पहले एक बार फिर से मेरी पहचान. मेरी उम्र 26 साल है, मैं कश्मीर से हूं. मेरा रंग गोरा और हाइट 5 फुट 7 इंच है. मेरा लंड 7.1 इंच का है काफी मोटा है, और चूत, गांड या चूची देख कर तुरंत चुदाई के लिए तैयार हो जाता है.

अब आगे की कहानी शुरू करते हैं. ज़ोया से ब्रेकअप के बाद मैं औऱ परी बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे. परी के घर जाकर बैठना मुझे काफी अच्छा लगने लगा था.उसके साथ उसके पापा, मम्मी और छोटा भाई रहता था. घर में परी के पापा ही ज्यादा रहते थे. क्योंकि उसके पापा लकवे के मरीज थे

उसकी मम्मी और भाई दोनों कम ही घर पर रहते थे. मैं जब भी उसके घर जाता तो उसके पापा के सामने हम दोनों अच्छी बातें करते थे लेकिन जब उसके पापा घूमने बाहर निकल जाते, तो हम दोनों अश्लील बातें करते थे. वो मेरे सामने लंड चूत बोलने में हिचकिचाती नहीं थी.

कुछ दिन बाद परी केटरिंग कंपनी में जॉब करने लगी.

वो क्लास खत्म करके अपनी जॉब पर जाती. क्लास और जॉब के बीच में कुछ समय बचता था, तो परी के जॉब पर जाने तक मैं और कहीं कोने में बैठ कर बतियाते रहते थे.उसकी मेरी वही बातें. उसका लंड इतना बड़ा,कल वो लड़की चुदी,आज वो चुदने जा रही फलाना-फलाना.

उसके पापा बाहर जाकर घूमते बहुत कम थे लेकिन बहुत देर तक बाहर बैठे रहते थे.अपनी शाम का पूरा वक्त वो बाहर ही बिताते थे और उस समय हम दोनों टीवी पर पोर्न देखते या बातें करते रहते थे, जब तक परी काम पर ना चली जाए.

एक दिन ऐसे ही बात करते वक्त उसने कहा- यार, जरा मेरी उंगलियां खींच दो! उसे मेरे हाथ से उंगलियां खिंचवाना अच्छा लगता था.उसने कहा, तो मैंने उसकी उंगलियां खींची और उससे कहा कि अब तुम मेरी भी खींच दो.

वो शरारत से बोली- क्या खींच दूँ?

मैंने कहा- अबे यार, उंगली खींचने की कह रहा हूँ.

वो उंगली खींचने लगी.

फिर मैंने मस्ती करते हुए कहा- तुम चाहो तो मेरी एक मोटी और सख्त उंगली भी है, ज़रा उसे भी खींच दो.

उसने कहा- कौन सी?

मैंने आंखें अपने लंड की तरफ कर दीं.

तो वो गाली देने लगी- साले हरामी.

मैंने अपना पैर ऊपर करके पैर की उंगली दिखाई और कहा- अबे यार तू भी ना जाने क्या गलत-सलत सोचती हैं. मैं तो पैर की उंगली के लिए कह रहा था.

इस तरह मस्ती करते हुए हम दोनों हंसने लगे.

फिर उसने कहा- अगर तुम मुझे अपनी वो मोटी और सख्त उंगली भी दिखा देते, तो भी मैं कुछ नहीं कहती. मैं को मजाक मे तुम्हे गाली दी

मैंने कहा- अभी भी देर नही हुई अंकल बाहर ही हैं, दिखाऊं क्या ?

वो कमीनेपन वाली हंसी हंसने लगी, मैं अपना हाथ पेंट की जीप तक लेकर गया कि तभी उसके पापा के आने की आहट हुई और हम दोनों ने टॉपिक चेंज कर दिया.फिर मैं कुछ देर बाद चला गया.

अब हमारी ऐसे ही बातें करने की आदत हो गई थी.दूसरे दिन जब मैं गया तो उसके पापा कुछ ही देर पहले घूमने निकले थे.उसकी मम्मी भी एक दिन के लिए अपने काम के लिए शहर से बाहर थीं. आज मेरे साथ कुछ और होने वाला था. उसके अब तक दो ब्वॉयफ्रेंड रह चुके थे. जिनके साथ वो चुद भी चुकी थी. लेकिन वह अभी भी कुंवारी थी. उसे कोई कायदे से चोद नहीं पाया और उसे ज़ोया ओर मेरी चुदाई के बारे में भी पता था.

मैं और वो बैठ कर बाते करने लगे. उसने कहा कि मेरा पहला ब्वॉयफ्रेंड जब अपना लोड़ा मेरे हाथ में देता था तो उसकी नसें उभरी हुई दिखती थीं.

मैंने कहा- सबकी ऐसे ही होती हैं.

उसने कहा- तो तुम्हारी भी तो होती होंगी?

मैंने कहा- हां, चाहें देख लो.

उसने कहा- चलो ठीक है, दिखाओ.

मुझे लगा कि वह मजाक कर रही है,

तो मैंने कहा- हाथ मे लोगी तभी दिखाऊंगा.

उसने कहा- ठीक है, हाथ में ले लूंगी.

मैंने अपना लोअर नीचे सरका दिया. उस दिन उसे शॉर्ट पहने हुए थो और ब्रा टाईट होने की वजह से उसके मुम्मे बहुत टाईट हुए पड़े थे. तो मेरा लंड पहले से ही गरम और सख्त हुआ पड़ा था. और चड्डी के ऊपर से भी उभरा हुआ दिख रहा था.वो पहली बार लंड नहीं देख रही थी लेकिन मेरा लंड देख कर चौंक गई थी. लंड खड़ा होकर फनफनाने लगा.

उसने आंखें फटी रह गईं

उसने कहा- अरे यार, तुम्हारा तो काफी बड़ा है.

मैंने कहा- हां हाथ में लो, तो और ज्यादा समझ में आएगा.

उसने मेरे लौड़े को हाथ में पकड़ लिया.

अब मेरे मन में बस यही था कि अंकल कुछ घंटे ना ही आएं तो अच्छा और इसे उल्टा करूं जल्दी से उसकी पैंटी फाड़ दूं और चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दूं.

वो मुझे पहले भी कई बार बता चुकी थी कि वो अपने पुराने बॉयफ्रेंड का लंड चार पांच बार मुँह में ले चुकी थी. लेकिन चूत में नहीं लिया था.उसकी चुत की सील अब तक सलामत थी.

मैंने कहा- लो अब अच्छे से चैक करो.

उसने अपने अंगूठे और एक उंगली से लंड को पकड़ा और देखने लगी.

मैंने पूछा- ये तुम्हारे एक्स से बड़ा है या छोटा?

उसने लंड को kamukta से देखते हुए कहा- ये लंबा उसके जितना ही है लेकिन तुम्हारा ज्यादा मोटा है.

मैंने कहा- अच्छे से हाथ से पकड़ो ना … उंगली से क्या समझ आएगा.ये कह कर मैंने उसका दुपट्टा खींच कर अलग कर दिया. उसके तने हुए बूब्स साफ़ दिखने लगा.अब मेरा लंड और भी ज्यादा तन गया.हालांकि मुझे लग रहा था कि वो लंड छोड़ देगी.लेकिन उसका इरादा तो कुछ और था

मेरे कहते ही उसने पूरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और सहलाने लगी.मैं पागल हो गया मैं उससे मुँह से चूसने के लिए कहने ही वाला था कि वो बोली- अभी इसे अन्दर कर लो. पापा के आने का टाइम हो गया है और मुझे भी जॉब पर जाना है.

मैंने चड्डी और लोअर ऊपर कर लिया और उसका दुपट्टा उसे दे दिया.दस मिनट बाद वो तैयार होकर जाने के लिए रेडी हो गई.

तब तक उसके पापा भी आ गए.हम बाहर निकलने लगे. बाहर बरामदे में आकर मैंने उससे कहा- परी, आज एक प्यार से किस दे दो. और अपने मुम्मे दबवा लो, बस एक मिनट के लिए

उसने तुरंत आगे बढ़ कर अपने मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया. मै उसकी बूब्स दबाने लगा, फिर उसने अपने होंठ हटा लिए .मैंने उसकी तरफ देखा और दोबारा किस करने लगा मगर उसने मना कर दी और बोली- अब बस! फिर मैंने भी ज्यादा फोर्स नहीं किया.

अगले दिन जब हम उसके घर पर मिले तो उसके पापा बेड पर लेटे थे और उसका भाई भी घर पर था. मैनें परी का पूछा, तो पता चला वो सामान लाने दुकान गई है.उसने ये भी बताया कि मम्मी का दो दिन बाद घर आएंगी.दस मिनट बाद परी आई.

फिर हम दोनों ने नॉर्मल बातें करने लगे. थोड़ी देर बाद उसने कहा कि मेरे बालों में तेल लगा दो. मैनें हां बोल दिया.

मैं एक छोटा टेबल लेकर बाथरूम के पास बैठ गया और परी मेरी तरफ पीठ करके जमीन पर बैठ गई. मैं उसके बालों में तेल लगाने लगा.जब पूरे बालों को तेल लग गया तब वह पलट कर मुझे देखने लगी. मैं उससे कुछ कहने ही वाला था कि वो मुझसे धीमी आवाज में बोली- एक और जगह पर लगा दोगे?

मैंने कहा- हां बताओ कहां पर लगवाना है.

उसने इधर उधर देखा और अपना टॉप उठा कर दिखाने लगी. उसके चूचे ब्रा में दबे हुए थे. मैंने भी इधर-उधर देखा और अपने दोनों हाथों से उसके चूचे दबाने लगा.एक मिनट के बाद उसने मेरा हाथ छुड़ाया और कहा- हाथ धोकर अन्दर कमरे में आ जाओ. वो कमरे में ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर खड़ी हो गई. मैंने हाथ धोए और उसके पास आ गया.वो मेरी तरफ देखने लगी, मैं उसके पीछे से होता हुआ उसकी बाईं तरफ खड़ा हो गया और उसकी गोल गद्देदार गांड पर हाथ फेर दिया.

वो कुछ नहीं बोली उल्टा अपने हाथ से चूचे दबाने लगी.मैं उसके पीछे खड़ा हो गया और अपनी पैंट के ऊपर से ही फूले हुए लंड से उसकी गांड पर धक्का लगा दिया.उसने कुछ नहीं कहा और मुस्कुराने लगी.मैं कुछ और करता, कि उसने तुरंत मेरा हाथ पकड़कर अपनी लैगिंग के अन्दर डाल दिया.

उसने मेरा हाथ अपनी पैंटी में डाला, और तो तुरंत ही निकाल लिया.मैंने उसे देखा तो वो बोली- थोड़ा रुको.

उसने पहले कमरे में देखा कि उसके पापा सो गए हैं. उसने अपने भाई को सामाव लेने भेज दिया.जैसे ही उसके नीचे जाने की आवाज आई, तो उसने मुझे बांहों में भर लिया. परी ने मुझे किस करना शुरू कर दिया,मैं भी उसके चूचे पकड़ कर उसे किस कर रहा था.कुछ देर बाद पीछे से ही मैनें उसकी लैगिंग उतारी और पैंटी में हाथ डाल दिया. उसकी चूत पूरी तरह गीली हो गई थी.

वो बोली- पापा यहीं हैं, अगर उठ कर यहां आ गए तो?

मैंने कहा- तो बता अब क्या करूं?

उसने कहा- बाथरूम में चलें?

मैंने हां कह दी.

पहले मैं अन्दर आ गया और वो पीछे से टीवी बंद करके आ गई.

हम दोनों एक दूसरे को खूब चूमा और कपड़े भी उतार दिए.मैं उसके चूचे नहीं बल्कि उसकी चूत और गांड के छेद में उंगली डाल रहा था.चूत चाटना परी का फेवरेट स्टेप था.

उसने कहा- मेरा फेवरेट स्टेप करो न!

मैंने उसका एक पैर नल के ऊपर रख दिया और खुद नीचे होकर उसकी चूत को चाटने लगा.परी ने आज तक अपनी चूत को लंड से दूर रखा था लेकिन आज मुझे उसके बदन के हर छेद को चोदने की तलब थी.जब मैं परी की चूत को चाट रहा था, वो ज़ोर से आवाज़ें निकाल रही थी.मैंने कहा - चिल्ला मत … तेरे बाप सुन लेंगे.

उसने कहा- पापा घूमने चले गए !

परी अचानक मेरा नाम ज़ोर से चिल्लाई, उसकी आवाज से मेरा लंड एक दम गरम हो गया. उसने मेरे बाल पकड़ कर सर ऊपर किया और बोली- और अंदर तक चाटो. मैं चूत ओर अंदर कर चाटने लगा, कुछ देर में उसकी चूत झड़ गई. मैं खड़ा हुआ और उसे किस किया. फिर उसका सर पकड़ कर नीचे बिठा दिया.

वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं.उसने अभी तक सिर्फ मुँह में लंड लिया था और चूचियां दबवाई थीं.मैनें अपने हाथ से उसके सर को पकड़ लिया. उसने तुरंत मेने लंड को चूसना शुरू कर दिया. लंड के साथ आंड भी चूसने लगी मैनें अपने पैर चौड़ा दिए. उसने गांड के छेद को भी खूब चाटा मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. उसने मेरे लंड को अफनी हलक तक ले लिया. उसे उल्टी आने लगी लेकिन उसने लंड बाहर नहीं निकाला. फिर एक दम लंड मूंह से बाहर निकाल कर बोली-अंदर ही झाड़ देना.

और तुरंत लंड मूंह मे ले लिया, मैं उसके मूंह में लंड से धक्के देने लगा और लंड अंदर हलक तक देने लगा.लेकिन अभी लंड झड़ा नहीं था कुछ देर बाद मैंने उससे कहा- खड़ी हो कर घूम जाओ.

मैंने पहले उसकी चूत को मसला और दूध भी चूसे.इस बीच वो मेरे लंड को हिलाती रही.उसकी चूत अभी तक गीली थी और वो लगातार उसे मसलती जा रही थी.

मैंने पीछे से उसकी गीली चूत के मुँह पर अपना लंड रख दिया और वो उसे हाथ से सहलाने लगी. मैंने खुद को उससे चिपकाए रखा और लंड को धक्का दिया जिससे आधा लंड अन्दर घुस गया.उसकी चूत बहुत टाईट थी. लंड अंदर जाते ही उसके मुँह से जोर से चिल्लाने की आवाज़ आई.

मैंने उसके दर्द की परवाह किए बिना जल्दी-जल्दी 3-4 शॉट आधे लंड से ही लगा दिए. फिर लंड निकाल लिया. फिर मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा उसे सीधा किया लंड को चूत के छेद पर लगाया. उससे कहा तैयार रहो जन्नत के लिए और एक ज़ोर का झटका देकर पूरा लंड चुत के अन्दर डाल दिया.

इससे वो तड़फ उठी और चीखने को हो गई. मेरा हाथ उसके मुँह पर लगा था तो उसकी आवाज जोर से नहीं निकली लेकिन वो बहुत जोर सो चीखी थी. आखिर पहली बार उसकी सील टूटी थी इतने सख्त लंड से.वो मुझे खुद से दूर करना चाहती थी. लेकिन मैंने उसे पकड़े रखा और दस बारह शॉट मार दिए.

मैं रुक गया पर उसे पकड़े रहा. अब मैनें उसके मूंह से हाथ हटा लिया. वो कराहती हुई अपनी चूत देखने लगी.दर्द तो उसे हो रहा था, फिर भी उसने लंड को अन्दर बाहर करने के लिए कहा.

वो मरी-मरी आवाज़ में बोली- आज मेरी चुत को फाड़ ही दो. दर्द की परवाह मत करो. मैं चीखती रहूं फिर भी मत रुकना

मैं भी कहां रुकने वाला था. मैंने शॉट पे शॉट लगाना शुरू कर दिए.वो थोड़ी ही देर में एक बार झड़ गई, और चुत के रस से मेरा लंड अब और आराम से अन्दर आ जा रहा था.

परी की दर्द से ‘आह … आ … आह …’ की आवाज़ आ रही थी.

मैं भी ‘बस … बस हो गया … थोड़ा सा और झेल लो …’ कह रहा था.

वो बोली- हां साले चोद ले, मगर याद रखना कि अन्दर ना निकले.मैंने उसे ओके कहा और कुछ देर बाद झड़ने का इशारा किया.वो मेरी पकड़ से अलग हुई. लंड बाहर निकाल कर मूंह में लिया और अंदर ही झड़वा लिया. झड़ने के बाद वो मैं स्टूल पर बैठ गया और वो मेरे ऊपर बैठ गई.

मैं चूत में उंगली फंसा कर कुछ देर वैसा ही बैठे हुए सहलाता रहा.फिर मैंने उसकी चूत और चूचे पानी से साफ कर दिए और कपड़े पहन कर हम दोनों बाहर आ गए.उसके पापा कमरे में नहीं थे. वो अपने कमरे में लेट गई और मैं भी सोफे पर लेट गया.इसके बाद उसके पापा आ गए और मैं कमरे में ही घुसा रहा.

उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और मेरी बांहों में आ गई.मैं उस रात परी के घर ही रुक गया. और पूरी रात हम नंगे होकर लेटे रहे. जब मन करता मैं उसे चोदता और वो मेरा लंड चूसती.मैंने उस रात परी को तीन बार चोदा और उसी के साथ सो गया.

सुबह जब उसके पापा घूमने गए तो मैं घर से निकल गया.उसके बाद हफ्ते में लगभग तीन बार हम चुदाई करते थे. उसे मुझसे प्यार नहीं था उसे बस मेरा लंड चाहिए था और मुझे चूत से मतलब था चाहें उसकी चाहें किसी और की.आकांक्षा ने मेरे लिए दो और चूतों का भी जुगाड़ किया,

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