स्कूल के टॉयलेट में लोड़ा चुसवाया और चूत भी मारी
आख्या के मुम्मों देखकर मेरा लोड़ा खड़ा हो गया. मेरा लोड़ा पहले कभी इतना ज्यादा खड़ा नहीं हुआ था. आख्या के मुम्मों बिल्कुल गोल थे और उसके गुलाबी निप्पल थे.
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Unknown
5/1/20261 min read
दोस्तो, मेरा नाम लक्ष्मण है, मैं मसूरी में रहता हूं.
यह बात तब की है जब मैं 20 साल का था और 12वीं क्लास में था.
मेरे स्कूल में सभी बच्चों के लिए गेम्स की तैयारी हो रही थी इसलिए सभी बच्चों को स्कूल के पार्क में ले जाया जा रहा था.
फंक्शन की तैयारी करने के लिए मेरा मन जाने का नहीं था इसलिए मैं बाथरूम में जाकर बैठ गया.
काफी देर बाद जब मुझे लगा कि सभी बच्चे पार्क में जा चुके हैं तो मैं बाहर जाने लगा.
तभी 12वीं क्लास का लड़का मुझे धक्का देते हुए अंदर घुसा और गेट बंद कर दिया.
उसका नाम विकास था.
विकास ने मुझे उठाया.
मुझे लगा वह टॉयलेट करने आया होगा.
मैं बोला- मैं बस जा ही रहा था, टॉयलेट करने आया हूं.
तो विकास ने कहा- ठीक है, जल्दी करो और जाओ. और बाहर किसी को मत बताना कि मैं यहां पर हूं.
तब मुझे समझ में आया कि वह भी यहां छिपने आया है.
तो मैंने उसे बताया कि मैं भी या छुपा हुआ हूं.
उसने कहा- ठीक है. लेकिन चुपचाप रहना. वरना किसी को पता चल जाएगा हम यहां पर हैं.
तो मैंने विकास से बोला- अगर कोई टीचर टॉयलेट आएगा तो उसे पता चल जाएगा कि हम यहां पर हैं. मैं अपनी क्लास में जा रहा हूं. अगर आपको आना हो तो आप आ जाना.
मेरी क्लास थर्ड फ्लोर पर थी और मेरे स्कूल में टॉयलेट सीढ़ियों के बगल में ही थे इसलिए हमें ऊपर जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी.
मैं और विकास हम दोनों ऊपर आ गए तो विकास ने कहा- हमें थोड़ी देर टॉयलेट में रुकना चाहिए. अगर हम अभी क्लास में जाएंगे तो कोई टीचर हमें देख लेगा।
मैं और विकास ऊपर वाले टॉयलेट में आकर छुप गए.
थोड़ी देर बाद हमें वहां कुछ आवाज सुनाई दी तो हम दोनों डर गए और हम लैट्रिन में जाकर छुप गए, गेट बंद कर लिया।
कुछ देर बाद जब हमने बाहर जाकर देखा तो वहां कोई नहीं था.
तो हमें लगा कि शायद कोई बच्चा होगा जो लास्ट में पार्क गया होगा.
लेकिन हमें फिर से आवाज सुनाई देने लगी तो मैंने वह आवाज ध्यान से सुनी.
वह आवाज गर्ल्स टॉयलेट से आ रही थी.
हमारे स्कूल में गर्ल्स टॉयलेट और बॉयज टॉयलेट अगर बगल ही बने हुए हैं.
और हमारे दीवार के ऊपर छत की तरफ एक छोटा सा रोशनदान या वेंटिलेशन है जिससे गर्ल्स टॉयलेट से बॉयज टॉयलेट में और बॉयज टॉयलेट से गर्ल्स टॉयलेट में देख सकते हैं।
मैंने विकास से बोला- शायद कोई टीचर होंगी. चुप रहो.
तो विकास बोला- अगर टीचर होती तो अब तक चली जाती. हमें यहां बहुत देर हो गई है. शायद कोई और लड़का होगा जो हमारी तरह ही आ चुका होगा.
मुझे भी उसकी बात सही लगी तो विकास ने बोला- चलो चल कर देखते हैं.
तो मैंने कहा- नहीं! अगर कोई लड़की हुई तो हमें प्रॉब्लम होगी.
जब मैंने मना कर दिया तो विकास ने कहा- ठीक है, तुम मेरे कंधे पर खड़े हो जाओ और खिड़की से देखो कि कौन है.
मैंने वैसा ही किया.
लेकिन जब मैंने खिड़की से देखा तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गई.
वहां पर एक लड़की थी जो अपने शर्ट के ऊपर के बटन खोले हुई थी. उसने अपने मुम्मों को बाहर निकाले हुए थे.
उसके मुम्मों बहुत सुंदर थे. उसके मुम्मों मीडियम साइज के लग रहे थे.
वह अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाए हुए थी और अपना एक हाथ अपनी चड्डी के अंदर डालकर अपनी चूत को अपनी उंगलियों से सहला रही थी.
दूसरे हाथ से वह अपने मुम्मों को दबा रही थी और निप्पल को खींच रही थी.
उसने अपना फोन वाश बेसिन के ऊपर रखा हुआ था जो कि मेरे नीचे था इसलिए मैं उस लड़की को साफ-साफ देख पा रहा था.
तभी विकास ने पूछा- क्या हुआ, मुझे भी बताओ?
तो मैंने उसे चुप रहने को बोला और फिर से उस लड़की को देखने लगा.
अब वह जोर शोर से अपनी चड्डी के अंदर हाथ डाल कर हिला रही थी और अपने दूध को मुंह से काटने की कोशिश कर रही थी।
तभी विकास ने फिर से बोला- क्या हुआ, मुझे भी बताओ.
तो मैंने उसे नीचे उतारने को बोला और उसे पूरी बात बताई.
तो विकास बोला- चलो चल कर उसे पकड़ते हैं.
मैंने कहा- नहीं, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए.
विकास बोला- इसमें कुछ भी गलत नहीं है. तुम्हें उसको देखने में मजा आया या नहीं?
तो मैंने कहा- मुझे मजा आया.
विकास बोला- चलो मैं तुम्हें पास से दिखाता हूं, तुम्हें और मजा आएगा.
मैंने भी हां बोल दिया.
अब हम दोनों बॉयज टॉयलेट से बाहर निकले और गर्ल्स टॉयलेट के गेट के बाहर खड़े हो गए.
विकास ने थोड़ा सा दरवाजा खोला और उस लड़की को देखने की कोशिश करने लगा.
वह लड़की विकास के क्लास की ही थी, उसका नाम आख्या था.
विकास ने तुरंत ही गेट खोला और अंदर चला गया.
मैं भी उसके साथ अंदर चला गया.
विकास ने गेट को उड़का दिया लेकिन चिटकनी बंद नहीं की।
आख्या हम दोनों को देखकर चौंक गई और अपने कपड़े पहनने लगी.
विकास ने जल्दी से उसका फोन उठाया और बोला- तुम यह क्या कर रही हो?
तो आख्या बोली- तुम्हें इससे क्या मतलब? तुम अपना काम करो.
विकास बोला- ठीक है, हम अपना काम करते हैं. चलो सर को जाकर बता देते हैं कि यह क्या कर रही है.
तो आख्या ने कहा- नहीं, सर को मत बताना. वरना मुझे पनिशमेंट मिलेगी और मेरे घर में भी पता चल जाएगा.
हम दोनों को आख्या बहुत डरी हुई लग रही थी इसलिए मैंने आख्या से कहा- ठीक है, हम किसी को नहीं बताएंगे. लेकिन विकास जो पूछ रहा है उसका साफ-साफ जवाब दो.
तो आख्या बोली- मैं अपने फोन में पोर्न वीडियो देख रही थी. मुझे यह वीडियो देखना पसंद है. आजकल तो सभी देखते हैं फिर वह किसी भी क्लास में हो या स्कूल में हो.
विकास बोला- ठीक है, हम किसी को नहीं बताएंगे लेकिन हमें तुम्हारे मुम्मों और चूत को देखना है और हमें छूकर देखना है।
तो आख्या ने हां बोल दिया और वो अपने शर्ट को खोलकर अपने मुम्मों दिखाने लगी.
आख्या के मुम्मों देखकर मेरा लोड़ा खड़ा हो गया. मेरा लोड़ा पहले कभी इतना ज्यादा खड़ा नहीं हुआ था.
आख्या के मुम्मों बिल्कुल गोल थे और उसके गुलाबी निप्पल थे.
उसके मुम्मों बहुत खूबसूरत लग रहे थे. बिल्कुल नई नवेली चूत जो होती है वैसे रंग को मुम्में..
मुझसे अब रहा नहीं गया, मैंने उसके एक बूब को पकड़ लिया और दबाने लगा और निप्पल को खींचने लगा.
आख्या भी मेरा साथ दे रही थी.
मैं उसके बूब को फिर से दबाने लगा.
मेरा एक हाथ अपने आप ही मेरी पैन्ट में चला गया और मैं अपने लंड को पकड़ कर दबाने लगा।
अब विकास ने भी आख्या का एक बूब पकड़ लिया और दबाने लगा और उसके एक बूब को चूसने लगा.
तो आख्या ने हम दोनों को अलग किया और कहने लगी- मैंने यह सब नहीं कहा था।
विकास ने आख्या से कहा- तुम तो मजे कर चुकी हो, हमें भी मजे कर लेने दो. हम इससे ज्यादा कुछ नहीं करेंगे.
तो मैंने कहा- अगर तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा तो हम नहीं करेंगे।
आख्या ने कहा- ठीक है, जो करना है करो … लेकिन जल्दी करो. वरना कोई आ जाएगा।
विकास ने आख्या को पकड़ कर अपने पास की खींचा और उसे लिप किस करने लगा.
थोड़ी देर बाद वह उसके मुम्मों को पकड़कर दबाने लगा और उसके निप्पल को चूसने लगा.
कुछ सेकंड बाद विकास रुका और बोला- आख्या, अगर तुम हमारे लोड़ा को पकड़ कर देखना चाहती हो और हमारे लोड़ा से मजे लेना चाहते हो तो तुम भी हमारे लोड़ा से खेल सकती हो. हम किसी को नहीं बताएंगे.
मैंने विकास से पूछा- लोड़ा क्या होता है?
तो आख्या और विकास दोनों हंसने लगे.
आख्या ने कहा- क्या तुमने कभी ऐसी नंगी लड़की देखी है?
तो मैंने कहा- नहीं, मैंने कभी नहीं देखी.
विकास बोला- तुम अपने पैन्ट में हाथ डालकर जिसको दबा रहे थे उसे ही लोड़ा कहते हैं.
तो मैंने आख्या से पूछा- क्या तुमने कभी असली लोड़ा देखा है?
आख्या ने कहा- हां, मैंने असली लोड़ा देखा है लेकिन सिर्फ वीडियो में देखा है.
अब मैंने आख्या से पूछा- क्या तुम हमारा लोड़ा देखना चाहती हो और हमारे लोड़ा के साथ मजे करना चाहती हो?
तो आख्या ने कहा- हां,
मैं बोला- तुम हमारे लोड़ा को पकड़ कर देख सकती हो और जो चाहे कर सकती हो. लेकिन उसके बदले हम तुम्हारे मुम्मों को और चूत को छेड़ेंगे और अच्छे से देखेंगे. इससे ज्यादा हम तीनों कुछ नहीं करेंगे. सिर्फ ऐसे ही मजा करेंगे.
तो आख्या ने हां बोल दिया और विकास भी मान गया।
मैंने आख्या को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे लिप किस करने लगा.
2 मिनट लिप किस करने के बाद मैंने उसके मुम्मों को पकड़ कर दबाने लगा और उसके निप्पल को मसलने लगा.
मैं उसके मुम्मों को बारी-बारी से चूस रहा था.
उसके मुम्मों मेरे हाथ में नहीं आ रहे थे पर उसके मुम्मों बहुत ही मुलायम थे. मुझे बहुत मजा आ रहा था.
फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी चड्डी के अंदर डाल दिया और उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने आख्या को फिर से लिप किस किया और उसके मुम्मों को दबाने लगा, फिर पीने लगा.
आख्या अब मेरा और विकास का लन्ड पकड़ कर अपने हाथों से धीरे-धीरे हिला रही थी.
हम दोनों के लोड़ा अब पूरी तरह खड़े हो चुके थे और काफी गर्म हो चुके थे.
फिर आख्या घुटनों पर बैठ गई और हमारे लोड़ा को और जोर-जोर से हिलाने लगी.
मेरा और विकास का लन्ड बराबर ही था लेकिन मेरा लन्ड गोरा था और विकास का लन्ड काला था जैसा उस वीडियो में उस आदमी का था।
अब वह हमारे लोड़ा को बड़े ध्यान से देख रही थी और जोर-जोर से हिलती जा रही थी.
थोड़ी देर बाद उसने मेरा लोड़ा अपने मुंह में ले लिया और मेरे टोपे को चूसने लगी. वह अपनी जीभ से मेरे टोपे के चारों तरफ घुमा रही थी और मेरे गोटे चाट रही थी.
फिर वह मेरे टोपे को चाटने लगी और मेरे लोड़ा को पूरा मुंह में लेकर बाहर निकाल दिया और मेरे टोपे को चूसने लगी.
फिर उसने मुझे पकड़कर नीचे खींचा और मेरे होठों पर एक लिप किस किया और फिर से मेरे लोड़ा को चूसने लगी.
वह मेरे लोड़ा को बहुत जोर शोर से चूस रही थी. वह मेरे लन्ड को अपना मुंह में पूरा ले रही थी और अपने मुंह को आगे पीछे करके जोर-जोर से चूस रही थी.
मुझे उसके मुंह के अंदर अपने लन्ड पर उसकी जीभ महसूस हो रही थी.
वह अपनी जीभ को मेरे लोड़ा के चारों तरफ सहला रही थी। वो भी भरी बैठी थी.. लेकिन सिर्फ पॉर्न से ही अपनी प्यास बुझाती थी..आज पहली बार लोड़ा देखा था उसने..
इसलिए वो पागलों की तरह चूसे जा रही थी..
मुझे बहुत आनंद मिल रहा था मुझे पहले कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था।
लगभग 10 मिनट तक ऐसे ही चूसने के बाद मुझे लगा कि मेरे लन्ड पर कुछ हो रहा है तो मैंने आख्या को बोला कि मुझे अपने लन्ड पर कुछ महसूस हो रहा है.
आख्या ने कहा- कोई बात नहीं, तुम मेरे मुंह के अंदर आ जाओ.
और फिर से मेरे लन्ड को चूसने लगी.
अब वह मेरे टोपे के चारों तरफ अपनी जीभ घुमा रही थी और मेरे लन्ड को पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी.
थोड़ी देर बाद मेरे लन्ड से बहुत गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ निकलने लगा जिसे आख्या सारा का सारा पी गई.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
अब आख्या विकास के पास गई और उसका लन्ड अपने मुंह में ले लिया.
आख्या ने विकास का पूरा लन्ड अपने मुंह में लिया और वैसे ही चूसने लगी जैसे मेरा लन्ड चूस रही थी.
अब आख्या विकास के गोटों को भी चाट और चूम रही थी और उसके लन्ड को अपने हाथ से हिला रही थी और फिर चूस भी रही थी।
विकास को बहुत मजा आ रहा था. विकास अपने एक हाथ से आख्या के दूध को दबा रहा था और उसके निप्पल को खींच रहा था.
अब आख्या को भी मजा आने लगा था और वह बड़े मजे से विकास का लन्ड चूस रही थी।
आख्या ने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रखा और अपनी उंगलियों से अपनी चूत को सहलाने लगी और अपने दूसरे हाथ से विकास का लन्ड हिला रही थी और जोर-जोर से चूस रही थी।
विकास एक हाथ से आख्या के दूध दबा रहा था तो एक हाथ से उस लड़की का सर पकड़ कर अपना लोड़ा उसके मुंह में अंदर बाहर कर रहा था.
वे दोनों ही इस खेल में माहिर लग रहे थे.
मैं उस लड़की के पास गया और उसके मुम्मों को दबाने लगा.
थोड़ी देर उसके मुम्मों को दबाने और निप्पल को खींचने के बाद मैंने उसकी स्कर्ट को ऊपर उठा दिया और उसके चूतड़ों को देखने लगा.
मुझे उसके गोल गोल चूतड़ देखकर बहुत अच्छा लग रहा था.
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया. मेरी उंगलियां उसकी चूत के ऊपर चल रही थी.
विकास ने मुझसे बोला- इसकी पैंटी को उतार दो.
तो मैंने उसकी पैंटी उतार दी.
अब उसकी चूत और उसकी गांड का छेद मेरे सामने था.
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसकी चूत बहुत गोरी थी बिल्कुल मेरे लन्ड की तरह।
मैं उसकी चूत पर हाथ फिराने लगा और अपने अंगूठे से उसके चूत के दाने को धीरे धीरे मसलने लगा.
मेरे ऐसा करने से वो अजीब सी आ आह उह ऊ हम्म जैसी आवाजें निकालने लगी और अपनी गांड उठा उठा कर मजा ले रही थी.
अब विकास ने मुझसे बोला- जैसे यह तुम्हारा लन्ड चूस रही थी वैसे ही अब तुम इसकी चूत को चाटो।
मैं अपना मुंह उसकी चूत के पास ले गया तो मुझे बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी.
उसकी चूत की खुशबू सूंघ कर में मदहोश होने लगा था.
मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ घुमाने शुरू कर दी और जोर जोर से चूसने लगा.
मैं अपनी जीभ उसके चूत के चारों तरफ जोर-जोर से घुमा रहा था और अपनी ज़ीभ और होठों से उसकी चूत को निचोड़ कर चूस रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी और आगे पीछे करने लगा.
साथ ही मैं उसकी चूत को जोर जोर से चूसने लगा.
अब उस लड़की को बहुत मजा आ रहा था.
विकास ने अपने दोनों हाथ बढ़ा दिए और उसके दोनों मुम्मों को दबाने लगा.
वो लड़की अब बहुत मजे ले ले कर अपनी चूत चुसवा रही थी और लोड़ा चूस रही थी।
थोड़ी देर ऐसे ही चूसने चाटने के बाद विकास और वो लड़की दोनों साथ में झड़ गए।
फिर हम सब अलग हुए और अपने अपने कपड़े पहने।
हम तीनों बहुत खुश थे.
मैं बोला- मुझे बहुत मजा आया. विकास तुम्हें मजा आया या नहीं?
तो वे दोनों बोले- हमें भी बहुत मजा आया।
मैंने उस लड़की को कहा- तुम्हें हमारा लोड़ा चूसने में ज्यादा मजा आया या अपनी चूत को चटवाने में ज्यादा मजा आया?
तो उसने कहा- दोनों में मजा आया.
मैं बोला- तुम जब चाहो मेरा लन्ड चूस सकती हो लेकिन तुम सिर्फ मुझे अपने मुम्मों दबाने देना और अपनी चूत दिखा देना मैं तुमसे और कुछ नहीं मांगूंगा.
तो उस लड़की ने बोला- ठीक है. मुझे भी तुम्हारे साथ बहुत मजा आया. मैं तुम्हें बता दूंगी जब भी मुझे तुम्हारा लोड़ा चाहिए होगा.
तो विकास बोला- तुम जब चाहो मेरा भी लोड़ा ले सकती हो. पर मेरी भी वही शर्त है.
आख्या ने हां बोला और हमें जाने को कहा.
तो विकास ने कहा- हम अपनी क्लास में जा रहे हैं. चाहो तो हमारे साथ आ सकती हो. यहां तुम्हें कोई देख लेगा.
वह भी हमारे साथ आ गई।
मैं उन दोनों को अपनी क्लास में ले गया और धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर जाने लगा.
तो हमने देखा कि वहां पहले से ही एक लड़की है जो मेरे क्लास की ही थी.
उसका नाम सोनम था वह भी अपने फोन में कुछ देख रही थी और अपनी चूत में तेजी से अंदर बाहर उंगली कर रही थी.
उसकी दोनों आंखें बंद थी और उसने अपनी चड्डी भी नहीं पहनी थी।
हम तीनों क्लास में गए और उसे भी रंगे हाथों पकड़ लिया था लेकिन सोनम को कुछ पता नहीं था कि उसके आसपास क्या हो रहा है.
सोनम ने अपनी दोनों आंखें बंद कर रखी थी और अपने कान में इयरफोन लगा रखे थे.
वह बहुत आनंद में लग रही थी.
मैं और विकास हम दोनों सोनम को देख रहे थे.
उसके मुम्मों आख्या से बड़े थे और बहुत सुंदर लग रहे थे।
हम तीनों को सोनम की चूत साफ दिखाई दे रही थी; उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.
वह अपनी दो उंगलियां चूत के अंदर बाहर कर रही थी और कभी अपनी गांड के छेद को उंगलियों से सहला रही थी.
एक हाथ से वह अपने मुम्मों को दबा रही थी और निप्पल को नोच रही थी।
यह देखकर मेरा और विकास का लोड़ा फिर से खड़ा हो गया था.
विकास ने आख्या को अपनी बांहों में पकड़ लिया और किस करने लगा.
अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था तो मैंने भी अपना लन्ड पैन्ट से बाहर निकाला और सोनम की चूत के पास बैठ गया.
मैंने अपना मुंह सोनम की चूत पर रख दिया और जीभ फिराने लगा.
अचानक हुए इस हमले से सोनम चौंक गई और उसके हाथ से फोन छूट गया.
उसने मुझे अपने से दूर हटाया और अपनी चड्डी ढूंढने लगी.
तो मैंने उससे कहा- देखो सोनम, परेशान मत हो. हमने तुम्हें सब करते देख लिया है. अगर तुम चाहो तो यह हमारे साथ भी कर सकती हो. हम भी तुम्हारे साथ सेक्स का मजा लेना चाहते हैं.
मैंने उसे बताया- अभी अभी हम तीनों टॉयलेट से एक दूसरे का लन्ड चूस कर और चूत को चाट कर ही आ रहे हैं. अगर तुम चाहो तो तुम भी हमारे साथ इस खेल का मजा ले सकती हो और हमारे साथ शामिल हो सकती हो।
विकास और आख्या किस कर रहे थे. आख्या ने विकास का लन्ड अपने हाथ में पकड़ रखा था और विकास ने अपना एक हाथ आख्या के स्कर्ट के अंदर डाल दिया था और उसकी चूत को सहला रहा था।
तो सोनम ने मेरा लन्ड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- ठीक है. लेकिन यहां पर हम चुदाई नहीं करेंगे. यहां पर सिर्फ एक दूसरे को मजे देंगे. हम चुदाई बाद में करेंगे.
हम सबने हां बोला और फिर हम चारों ने दोबारा वही खेल खेला और एक दूसरे को खूब मजा दिया.
अब हम चारों एक दूसरे को चूस और चाट रहे थे.
करीब 1 घंटे तक ऐसे ही मजे करने के बाद हम सब अलग हुए और अपने कपड़े पहन लिए।
हम सबने एक दूसरे को अपने नंबर दिए और दोबारा मिलने का वादा किया।
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