18 साल की चूत में 30 साल का लोड़ा, चाचा ने भतीजी को जबरदस्त तोड़ा

उसके ठोस मम्मे देख कर मेरा लोड़े एकदम से कड़क हो गया. मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया. मैंने उसके दोनों चूचों को जी भरकर चूसा

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5/11/20261 min read

मेरा नाम रहमान है, मेरी उम्र 30 साल है. मैं जिला मुरादाबाद का रहने वाला हूं.

शादीशुदा हूं और हाईट 5 फुट 8 इंच है.

जब देश में लॉकडाउन था, तब मेरी भतीजी रेशमा मेरे ताऊ जी के घर आई.

रेशमा की उम्र 18 साल है और उसकी हाईट 5.3 फुट की है. वो एक मस्त माल है. उसके मुम्मे 32 नाप के हैं.

उसके आने के बाद मैं भी वहां चला जाता तो हमारी नार्मल बातें हो जाती थीं.

रात को हम सब लूडो व कैरम खेलते थे.

एक दिन मेरी पत्नी को शक हुआ कि रेशमा फोन पर किसी से बात करती है.

उसने अपने इसी शक को लेकर मुझे उस पर नजर रखने को कहा.

दो दिन बाद मेरी पत्नी मायके चली गयी.

मैंने अपनी भतीजी रेशमा पर नजर रखी तो मेरी पत्नी की बात सही निकली.

वो अपनी क्लास के लड़के से बात करती थी.

जब मैंने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया तो वो घबरा गई.

मैंने उसे समझाया- रेशमा ये ठीक नहीं है.

परंतु वो सर नीचा करके बोली- मैं उसके बिना मर जाऊंगी, मैं कोई गलत काम नहीं करूंगी. बस आप मुझे उससे बात करने दो.

मैंने मन में सोचा कि क्यों ना मैं भी बहती गंगा में हाथ धो लूं. मैंने उसे डांट दिया और उसे अपने डर से और ज्यादा डरने पर मजबूर कर दिया.

हालांकि मैंने उससे ये भी कह दिया- आज तो मैं इस बात को यहीं खत्म कर रहा हूँ मगर तुमने मेरी बात नहीं मानी … तो मुझे ये बात तुम्हारी मम्मी से भी कहना पड़ेगी. जो गलत है वो गलत है तो मान जाओ वरना डांट खाने को मिलेगी सबसे..

वो इस बात से सहम गई और बोली- आप जो कहेंगे मैं करूंगी … मगर आप प्लीज़ इस बात को किसी से मत कहना.

उसकी इस बात से मुझे समझ आ गया कि रेशमा चुदने के लिए मान जाएगी.

अगले दिन मैंने उसको अपने घर बुलाया और उसे चुम्मी करने लगा तो वो मुझसे दूर जाने लगी और उसने मुझे चुम्मी नहीं करने दिया.

मैंने उससे कहा- रेशमा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ.

मगर वो नहीं मानी और अपने नाना के घर चली गई.

उसी दिन शाम को मैंने उसको अकेले में पाकर एक चाकलेट दी और उसे आई लव यू कहा.

पर वो नहीं मान रही थी.

उसने कहा- मैं उसी लड़के से प्यार करती हूँ.

मैं कुछ नहीं बोला और उसे जाने दिया.

अगले दो दिन बाद उसका बारहवीं का रिजल्ट आया और वो 75% मार्क्स लेकर पास हुई.

मैंने बोला- अब मुझे पार्टी दो.

वो बोली- आज मैं खुश हूँ, बोलो आप क्या खाओगे?

मैं बोला- तुम्हारी चूत.. वो मोटी गांड.. अरावली की पहाड़ियों जैसे मुम्में.. होंठों का रस.. ये सब मैं मन में कह रहा था.. लेकिन हकीकत में मैनें बस यही कहा.. मुझे चुम्मी चाहिए.

उसने फिर से मना कर दिया और हंस कर चली गई.

उसकी आज की हंसी से मुझे समझ आ गया कि चूत लोड़े की भूखी है और थोड़े से प्रयास से लोड़े के नीचे आ जाएगी.उछल उछल कर मूंह में लेगी..

उसके बाद मैं जब भी उससे व्हाट्सैप पर बात करता तो मैं चुम्मी की डिमाण्ड कर देता और वो हंस कर जीभ चिढ़ाने वाली इमोजी भेज देती.

मैं उससे कहता रहा कि देख रेशमा मैं तुमको बहुत प्यार करूंगा और तुझे एक अनुभवी मर्द का प्यार दूंगा. वो लौंडा तुझे उतना मजा नहीं देगा … फिर भी तू उसे प्यार करती रह, मुझे कोई दिक्कत नहीं है. बस एक बार तू मुझे चख कर तो देख ले.

वो मेरी बातों से रस लेती लेकिन आखिरी में मुझे ठेंगा दिखा देती.

उसकी हरकतों से मुझे भी लगने लगा था कि ये मेरी बातों से रस लेती है और एक न एक दिन मेरे लोड़े के नीचे आ ही जाएगी.

चूंकि लॉकडाउन लगा हुआ था तो कोई भी कहीं आ जा नहीं पा रहा था.

वो भी अपने ही घर बनी रही.

हम दोनों अभी भी लूडो खेलते थे और मैं खेल में उसकी गोटी मार देता तो वो कहती तुमने आखिर मेरी मार ही दी.

मैं भी कह देता- चलो तुमको मरवाने में मजा तो आया.

वो मेरी आंखों में शरारत से देखती और मुझे जीभ चिढ़ा देती.

फिर एक दिन वो मान ही गयी.

मैं उसे अपने घर लेकर आया.

मेरी बीवी भी घर पर नहीं थी इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था.

मैंने रेशमा को अपने घर में लाकर इसे अपनी बांहों में भर लिया और चूमने लगा.

रेशमा भी मुझे साथ देने लगी और कहने लगी- तुम बहुत हरामी हो आखिर अपनी भतीजी को सैट कर ही लिया.

मैंने कहा- रेशमा तुम्हारा भी तो मन था न … तभी तो तुम मेरे साथ राजी हो गई हो?

वो बोली- हां , आज मेरा बहुत जी कर रहा था … मुझे रहा नहीं जा रहा है आज आप मुझे जी भर के प्यार करो.मुझे इतना चोदो की चूत का चबूतरा बन जाए.. हाहाकार मचा दो आज.. आज मैं आपकी जहां घुसाना है अपना लोड़ा घुसा दो..

मैंने उसकी गर्दन से चूमना शुरू करके उसे गर्म करना शुरू कर दिया.

गर्दन से नीचे मैं उसके जवान और कड़क मम्मों पर आ गया

वो गर्मा गई और आह आह करने लगी.

मैंने उसके टॉप को उतार दिया. उसने ब्रा नहीं पहनी थी.

उसके ठोस मम्मे देख कर मेरा लोड़े एकदम से कड़क हो गया.

मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया. मैंने उसके दोनों चूचों को जी भरकर चूसा.

फिर मैंने रेशमा की बुर पर हाथ फेरा तो उसकी बुर पूरी गीली हो गयी थी. वो कई बार झड़ चुकी थी अब तक..

मैंने उसकी जींस उतारनी चाही मगर वो झड़ चुकी थी और उसकी उत्तेजना खत्म हो गई थी.

इससे वो मुझे दूर होने लगी.

मैंने उससे बहुत कहा मगर वो इससे आगे करने के लिए नहीं मानी.

मेरे चूमने काटने से उसके गालों पर निशान बन गए थे.

वो काफी देर तक अपने चेहरे को ठीक करने की कोशिश करती रही पर तब भी दो तीन निशान काफी गहरे बन चुके थे.

मैंने उसको बर्फ लगाने को बोला.

वो कुछ नहीं बोली और मेरे घर से चली गई.

फिर दो तीन दिन में उसके निशान ठीक हो गए.

उसके दस दिन बाद मैंने उससे फिर से सेक्स के लिए कहा तो वो राजी हो गई.

पर वो बोली- इस बार निशान नहीं होने चाहिए और मैं सेक्स नहीं करूंगी, ऊपर ऊपर से तुमको जो करना हो, कर लेना.

उसकी इस बात से मैं समझ गया कि लौंडिया को खेलने का मन तो है मगर जरा नखरे कर रही है.

मैंने कहा- हां ठीक है, आ जा.

वो आई तो मैंने उसके टॉप को निकाल कर इसके दोनों निप्पलों को खूब चूसा.

वो भी गर्म हो गयी थी.

अब मैंने उसकी पजामी निकाली, तो बोली- सेक्स नहीं करना.

मैं बोला- अन्दर नहीं डालूंगा, बस ऊपर ऊपर घिस लूंगा.

वो नशीली आंखों से मुझे देखती हुई बोली- ठीक है.

अब मैंने उसे पूरी नंगी कर दिया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया.

पहले मैंने उसकी बुर चूसी तो उसे मजा आने लगा.

मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर बुर में मुँह मारने लगा.

उसकी बुर में मर्द की जीभ घुसी तो उसकी गर्म सीत्कारें निकलने लगीं और उसके दोनों हाथ मेरे सिर पर आ गए.

वो मेरे सर को अपनी बुर पर दबाने लगी.

मैं बार बार उसकी बुर से मुँह हटा लेता था तो वो कसक उठती थी- मुँह क्यों हटा लेते हो … चूसो ना.. मजा आ रहा है!

मगर मुझे मालूम था कि ये झड़ जाएगी तो लोड़े नहीं लेगी और भाग जाएगी.

मैंने कहा- अब तेरी चूत को जीभ से कुछ नहीं होगा. इसे लोड़े से घिसना पड़ेगा.

वो पागल हो उठी थी तो कहने लगी- आपको जिससे घिसना हो उससे घिसो … मगर मेरी आग ठंडी कर दो.

इसके बाद मैं नंगा हो गया और अपना लोड़े उसके सामने लहरा दिया.

वो मेरे खड़े लोड़े को देख कर वासना से भर गई और बोली- अब दिखाते ही रहोगे या इससे मेरी बुर को रगड़ोगे भी?

मैंने उसकी बुर के ऊपर लोड़े घिसा.

तो उसे मजा आने लगा.

मैंने उसकी बुर की फांकों में लोड़े का सुपारा फंसा कर बुर को रगड़ा तो उसे जन्नत कर सुख मिलने लगा.

उसने थोड़ा सा लोड़े अन्दर जाने दिया.

तभी वो झड़ गई और बोली- बस करो … अब मुझे जाना है. आज के लिए इतना ही काफी है.

मैंने उससे कहा- ठीक है रेशमा मैं आगे नहीं करूंगा … लेकिन मुझे भी तो शांत कर दे.

वो हंसी और बोली- अपने हाथ से हिला लो न.

मैंने कहा- तुम नहीं करोगी तो हाथ से तो करना ही पड़ेगा.

वो मेरी मायूसी देख कर बोली- चलो आप ही क्या याद करोगे, मैं ही अपने हाथ से आपका हिला देती हूँ.

मैंने उसके सामने लोड़े कर दिया. वो मेरे लोड़े को हाथ से हिलाने लगी. मगर मेरा लोड़े झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.

वो बोली- आपका लोड़े झड़ क्यों नहीं रहा है?

मैंने कहा- मेरी बीवी भी इसे मुँह में लेकर चूसती है तभी इसका रस निकल पाता है.

वो मेरी आंखों में देखने लगी और उसने पहली बार मुझे गाली दी- महामादरचोद हो तुम … अपनी भतीजी से लोड़े चुसवाना चाह रहे हो?

मैंने उसके दूध मसलते हुए कहा- रेशमा तुम बहुत सेक्सी माल हो … प्लीज़ मेरे लोड़े को अपने मुँह में लेकर चूस दो न.

उसने मेरे लोड़े के सुपारे पर जीभ फेरी और लोड़े चाटने लगी.

कुछ ही देर में वो मेरे लोड़े को मुँह में भर कर चूसने लगी.

मुझे अपनी भतीजी से लोड़े चुसवा कर बेहद मजा आने लगा.

कुछ ही देर में मैं झड़ने को मजबूर हो गया और मैंने उसके मुँह से लोड़े निकाल कर रस फेंक दिया.

इसके बाद रेशमा और मैंने कपड़े पहन लिए.

रेशमा अपने घर चली गई.

दो दिन बाद मैंने रेशमा को फिर से घर बुलाया.

तो वो पहले की तरफ फिर से सेक्स के लिए मना करने लगी.

मैंने कहा- ठीक है जैसा तुम कहोगी, वैसा ही करूंगा.

फिर वो आई तो मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसकी बुर को चूसना शुरू कर दिया. पूरा अंदर तक उसकी चूत की सिकाई कर दी..

वो गर्म आवाजें निकाल रही थी- आह उह शशश आह शश आह ऊहु!

कुछ देर बाद मैंने लोड़े को बुर पर घिसना शुरू कर दिया तो उसे और मजा आने लगा.

पर बीच बीच में वो ये कहती रही- अन्दर नहीं डालना, दर्द होगा.

मैंने कहा- ठीक है.

मैं बुर पर लोड़े घिसता रहा और वो सेक्सी आवाजें भरती रही- आह शश आह ऊह कितना मजा आ रहा है … आह आई लव यू आप कितने अच्छे से प्यार करते हो. आपकी बीवी तो मौज में रहती होगी.. क्या मस्त चूसू आदमी हो यार आप.. बिना चोदे चूत में भूचाल ला दिया..

फिर अचानक से मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और अपना पूरा लोड़े उसकी बुर में उतार दिया.

उसे दर्द हुआ और वो मेरे नीचे से निकलने को मचलने लगी.

उसकी बुर फट गयी थी और उसकी बुर से खून निकलने लगा था.

बिस्तर की चादर खून से लाल हो गयी थी.

मैंने उसे छोड़ दिया और उसे बाथरूम में ले गया. मैंने उसकी बुर को गर्म पानी से धोया और उसकी ब्लीडिंग रोकने के लिए उसको बुर लगाने के लिए अपनी पत्नी का एक पैड दे दिया.

फिर मैंने उसे गोली दी ताकि उसका दर्द खत्म हो जाए.

उसके आधा घंटा बाद जब उसका दर्द कम हो गया तो वो अपने घर चली गयी.

हालांकि उसने मुझसे कुछ नहीं कहा था कि मैंने उसकी बुर में लोड़े क्यों पेला.

एक सप्ताह बाद मैंने उसको फिर से चुदाई के लिए बुलाया.

इस बार उसकी बुर में लोड़े के लिए आग लगी थी तो वो चुदने के लिए राजी थी.

इस बार मैंने उसे गर्म किया और अपना पूरा लोड़े उसकी बुर में उतार दिया.

कुछ देर की कसमसाहट के बाद वो अपनी रौ में आ गई और मजा लेने लगी- आह ऊह चोद दो … फाड़ दो आह ऊह शशश आहह ऊहहह आह मर गयी … एह ऊह शश आह!

वो मजे लेकर चुदवाने लगी.

सेक्स के बाद उसने बताया कि उसकी सहेलियों ने उसे बताया था कि पहली बार बहुत दर्द होता है इसलिए वो डरी हुई थी.

इसके बाद अब वो मुझसे दो तीन दिन में चुद जाती है. वो कहती है कि अब उसे हर रोज चुदाई का मन करता है. पर ये सम्भव नहीं है.

लेकिन जब भी मौका मिलता मैं उसे चोद देता.. एक दो बार तो खड़े-खड़े जल्दी-जल्दी में ही हमने चुदाई कि है.. खैर वो कहानी फिर कभी